नई दिल्ली: हैदराबाद में आधी रात डर और दहशत के बीच उम्मीद की किरण बनकर सामने आई HYDRA DRF की टीम. मीर आलम तालाब में मगरमच्छों से घिरे पानी के बीच एक नाव में फंसे नौ मजदूर मदद के इंतजार में कांप रहे थे. अंधेरा, घनी झाड़ियां और चारों ओर मगरमच्छों की मौजूदगी हालात को और खतरनाक बना रही थी.
यह घटना उस समय सामने आई, जब पुल निर्माण से जुड़े मिट्टी परीक्षण कार्य के दौरान मजदूरों की नाव का इंजन अचानक जवाब दे गया. शाम ढलते ही लौटने की योजना फेल हो गई और देखते ही देखते तालाब में फंसे मजदूरों की जान पर बन आई. ऐसे हालात में HYDRA DRF की त्वरित और साहसी कार्रवाई ने सभी को सुरक्षित जीवनदान दिया.
रविवार को मजदूरों और इंजीनियरों की टीम मीर आलम तालाब में मिट्टी परीक्षण के लिए गई थी. काम खत्म होने से पहले ही नाव का इंजन खराब हो गया. धीरे-धीरे अंधेरा बढ़ता गया और नाव चारों तरफ से पानी में घिर गई. तालाब में मगरमच्छ होने की जानकारी से मजदूरों का डर और बढ़ गया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होती नजर आई.
खुद को असहाय महसूस कर रहे मजदूरों ने तुरंत पुलिस के 100 नंबर पर कॉल कर मदद मांगी. सूचना मिलते ही मामला HYDRA DRF कंट्रोल रूम तक पहुंचाया गया. मजदूरों ने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर अपनी लोकेशन बताई. फोन पर उनकी घबराई आवाजें साफ बता रही थीं कि हालात बेहद गंभीर हैं और हर मिनट कीमती है.
HYDRA DRF के स्टेशन फायर ऑफिसर जमील और टीम प्रभारी स्वामी ने मजदूरों से सीधे बात कर उन्हें हिम्मत दी. उन्होंने साफ कहा कि हालात चाहे जैसे हों, सभी को सुरक्षित निकाला जाएगा. इस भरोसे ने मजदूरों को मानसिक ताकत दी और वे राहत की उम्मीद के साथ मदद का इंतजार करते रहे.
घने अंधेरे और कम दृश्यता के बीच DRF की टीम नाव लेकर तालाब में उतरी. पहले प्रयास में चार मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इसके बाद टीम तुरंत वापस लौटी और बाकी पांच मजदूरों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया. पूरे ऑपरेशन के दौरान मगरमच्छों की मौजूदगी के बावजूद टीम ने सतर्कता नहीं छोड़ी.
रेस्क्यू के बाद सभी मजदूरों को ओल्ड बस्ती चिड़ियाघर पार्क के पास सुरक्षित उतारा गया. जान बचने पर मजदूरों ने राहत की सांस ली और DRF टीम का आभार जताया. यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि HYDRA DRF आपात हालात में जान बचाने के लिए हर वक्त तैयार रहती है.