लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं. देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की होती है. ऐसे में अचानक बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल (DG) नितिन अग्रवाल को हटा दिए जाने से कई तरह से सवाल खड़े हो रहे हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि पिछले एक साल से लगातार हो रहीं आतंकी गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहने के चलते बीएसएफ के डीजी और स्पेशल डीजी को हटा दिया गया है. बता दें कि 4 जून के बाद से लगभग हर दिन जम्मू-कश्मीर में एनकाउंटर हो रहा है जिसमें सुरक्षा बलों के कई जवान शहीद हो चुके हैं.
गृह मंत्रालय ने बीएसएफ के डीजी नितिन अग्रवाल को हटाकर उनके मूल केरल काडर में भेज दिया गया है. वहीं, स्पेशल डीजी के पद पर तैनात वाई बी खुरानिया को उनके ओडिशा काडर में वापस भेज दिया गया है. गृह मंत्रालय ने इसे 'प्रीमेच्योर रिपैट्रिएशन' करार दिया है. अगर पिछले कुछ सालों का इतिहास देखा जाए तो ऐसा पहली बार हुआ है कि इतने बड़े स्तर के अधिकारियों को इस तरह से हटाया गया हो. फिलहाल, यह तय नहीं है कि इन दोनों की जगह पर किसे तैनात किया जाने वाला है.
जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात तक और इसी तरह की अन्य सीमाओं की रक्षा की जिम्मेदारी बीएसएफ के जिम्मे ही है. जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस भी इस काम में उसका साथ देती हैं. हालांकि, बीते कुछ महीनों में देखा गया है कि सीमा पार से आतंकी भारत में घुस आए हैं. बीएसएफ इनको रोकने में नाकामयाब रहा जिसके चलते इन आतंकियों ने देश के कई लोगों पर हमले किए. जम्मू-कश्मीर के अलावा पंजाब में भी सीमा पार से हो रही गतिविधियों के चलते इन अधिकारियों पर गाज गिरी है.
बता दें कि नितिन अग्रवाल ने 2022 के जून महीने में बीएसएफ के मुखिया का यह पद संभाला था. वहीं, ओडिशा खुरानिया पाकिस्तान से लगने वाली सीमा की देखरेख कर रहे थे. बीएसएफ के लगभग 2.65 लाख जवान बांग्लादेश और पाकिस्तान से लगने वाली भारतीय सीमाओं की रक्षा करते हैं.
आंकड़ों की मानें तो इस साल 21 जुलाई तक हुए आतंकी हमलों और एनकाउंटर में 14 आम नागरिकों और 14 जवानों की जान गई है. कुल 11 आतंकी घटनाएं और 24 एनकाउंटर हो चुके हैं. इससे पहले, केंद्र सरकार ने ओडिशा से दो और बटालियन जम्मू-कश्मीर के लिए भेजी थी ताकि सुरक्षा व्यवस्था को और चाक-चौबंद किया जा सके.