नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में इन दिनों फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ती नजर आ रही है. इसी बीच एक टेस्टिंग डाटा ने चिंता बढ़ा दी है. Redcliffe Labs के आंकड़ों के मुताबिक, मई से अगस्त 2026 के बीच H1N1 की जांच कराने वाले करीब 8 प्रतिशत सैंपल पॉजिटिव पाए गए. इस अवधि में किए गए अलग-अलग इंफ्लुएंजा टेस्ट में यह सबसे ज्यादा पॉजिटिविटी रेट रहा.
इतना ही नहीं, इस दौरान सभी तरह की इंफ्लुएंजा संबंधी जांच को मिलाकर कुल पॉजिटिविटी रेट करीब 5.5 प्रतिशत रहा. इसका मतलब है कि फ्लू जैसे लक्षणों के साथ टेस्ट कराने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या में इंफ्लुएंजा संक्रमण की पुष्टि हुई है.
इस समय दिल्ली में मौसमी फ्लू की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं और H1N1 को इस सीजन में प्रमुख रूप से सामने आने वाले स्ट्रेन में गिना जा रहा है. पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले इस साल H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट्स भी सामने आई हैं. ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि फ्लू जैसे लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
Redcliffe Labs की डायरेक्टर लैब ऑपरेशंस डॉ. सोनल सक्सेना के मुताबिक, H1N1 टेस्टिंग में लगभग 8 प्रतिशत पॉजिटिविटी एक ऐसा संकेत है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है, खासकर तब जब लक्षण लगातार बने रहें या धीरे-धीरे ज्यादा खराब होते जाएं.
H1N1 और दूसरे सांस से जुड़े संक्रमणों के लक्षण कई बार एक जैसे ही नजर आते हैं. इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और ज्यादा थकान शामिल हो सकते हैं. यही वजह है कि केवल लक्षण देखकर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि मरीज को सामान्य फ्लू है या कोई दूसरा संक्रमण. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से टेस्ट कराना सही कारण पता लगाने में मदद कर सकता है.
खास तौर पर अगर बुखार लंबे समय तक बना रहे, खांसी बढ़ती जाए, सांस लेने में परेशानी हो या शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है.
फ्लू के बढ़ते मामलों के बीच सावधानी सबसे आसान बचाव है. भीड़भाड़ वाली जगहों पर सतर्क रहें, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें और हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें. सबसे जरूरी बात यह है कि लगातार बने रहने वाले सांस संबंधी लक्षणों को हल्के में न लें. समय पर मेडिकल जांच और सही सलाह से संक्रमण की पहचान और इलाज दोनों में मदद मिल सकती है.