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India Daily

दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत को लेकर अमेरिकी सांसदों ने जताई गंभीर चिंता, भारत से की ये अपील

अमेरिका के आठ सांसदों ने उमर खालिद की लंबी न्यायिक हिरासत पर चिंता जताते हुए भारत सरकार से जमानत और शीघ्र, निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद की जमानत को लेकर अमेरिकी सांसदों ने जताई गंभीर चिंता, भारत से की ये अपील
Courtesy: social media

दिल्ली दंगों के कथित षड्यंत्र मामले में पिछले पांच वर्षों से जेल में बंद सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद का मामला एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ गया है. अमेरिका के आठ प्रभावशाली सांसदों ने भारत के राजदूत को पत्र लिखकर उमर खालिद की निरंतर हिरासत पर 'गंभीर चिंता' जताई है. सांसदों ने भारत सरकार से खालिद को जमानत देने और समयबद्ध व निष्पक्ष ट्रायल सुनिश्चित करने की मांग की है.

अमेरिकी सांसदों का हस्तक्षेप

अमेरिका के प्रतिनिधि जिम मैकगवर्न और जैमी रास्किन के नेतृत्व में आठ सांसदों ने भारत के अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को यह पत्र भेजा. इसमें सीनेटर क्रिस वैन हॉलन और पीटर वेल्च सहित कई सांसद शामिल हैं. पत्र में कहा गया है कि बिना ट्रायल के इतने लंबे समय तक हिरासत अंतरराष्ट्रीय न्याय मानकों के अनुरूप नहीं है.

यूएपीए पर उठे सवाल

सांसदों ने पत्र में भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान जताते हुए भी यूएपीए कानून के तहत जमानत की कठोर शर्तों पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि पांच साल से अधिक समय तक बिना दोष सिद्ध हुए जेल में रहना अपने आप में दंड जैसा है. सांसदों ने इसे मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया.

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया तेज

इस मामले में अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है. 1 जनवरी 2026 को न्यूयॉर्क शहर के नए मेयर जोहरान ममदानी ने भी उमर खालिद के समर्थन में संदेश साझा किया. इसके अलावा एमनेस्टी इंटरनेशनल और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ जूरिस्ट्स जैसे संगठनों ने बार-बार जमानत खारिज होने पर आपत्ति जताई है.

क्या है पूरा मामला

उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को दिल्ली दंगों के कथित बड़े षड्यंत्र के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, दंगों से जुड़े कुछ छोटे मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है, लेकिन यूएपीए के तहत दर्ज मुख्य केस के कारण वे अभी भी तिहाड़ जेल में बंद हैं. उन्हें केवल सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत मिली है.

सरकार का पक्ष और आगे की राह

दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार का कहना है कि उमर खालिद ने 2020 की हिंसा की साजिश में अहम भूमिका निभाई थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई. सरकार का दावा है कि आरोप गंभीर हैं और यूएपीए का इस्तेमाल उचित है. अब अमेरिकी सांसदों की अपील के बाद यह देखना अहम होगा कि आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है.