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सरकार ने ईधन पर घटा दी एक्साइज ड्यूटी! जानें पेट्रोल-डीजल के दामों में होगी कितनी कटौती

मिडिल ईस्ट तनाव को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर से एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती की गई है. हालांकि सरकार के इस फैसले से ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता होगा, इसे समझना काफी जरूरी है.

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Edited By: Shanu Sharma
सरकार ने ईधन पर घटा दी एक्साइज ड्यूटी! जानें पेट्रोल-डीजल के दामों में होगी कितनी कटौती
Courtesy: ANI

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दामों में उछाल आई है. हालांकि स्थिति को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती का फैसला लिया है. सरकार के इस कदम से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन खुदरा बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल गिरावट की संभावना नजर नहीं आ रही है.

सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर ड्यूटी को 10 रुपये प्रति लीटर से शून्य कर दिया गया है. वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह कटौती तुरंत प्रभावी हो गई है.

कैसे तय होते हैं तेल के दाम

कागजी रूप से यह फैसला पंप की कीमतों को कम करने वाला माना जा रहा है, लेकिन वास्तविकता अलग है. भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें सरकारी नियंत्रण में नहीं हैं. देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत IOC, BPCL और HPCL जैसी तेल विपणन कंपनियां तय करती हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि तेल कंपनियां ड्यूटी कटौती का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक तुरंत पहुंचाने की स्थिति में नहीं हैं. मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण पिछले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ी हैं. कंपनियां पहले से ही बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठा रही हैं. ऐसी स्थिति में कंपनियां ड्यूटी में मिली राहत का इस्तेमाल पिछले नुकसान की भरपाई या अपने मार्जिन को स्थिर करने में कर सकती हैं.

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. कई देशों में ईंधन की कीमतों में 30 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ गई है. मंत्री ने कहा कि सरकार के पास दो रास्ते थे पहला कि पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर डालना और दूसरा कुछ हिस्सा खुद झेलना था. सरकार ने दूसरा रास्ता चुना ताकि भारतीय उपभोक्ताओं को राहत मिल सके. उन्होंने बताया कि तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है, ऐसे में टैक्स कटौती से कुछ राहत मिल सकती है.