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अनुच्छेद 370 हटने के बाद, कितनी बदली कश्मीर घाटी? बदलाव बना वरदान या अभिशाप, समझिए कहानी

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के पांच साल पूरे हुए. भाजपा ने जम्मू-कश्मीर में इसे उत्सव की तरह मनाने का ऐलान किया है. आज यानी 5 अगस्त से 15 सितंबर तक पूरे घाटी में इस दिन को समारोह की तरह मनाया जाएगा. खबरों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं की संख्या में कमी आई है. आकड़ो की मानें तो इस साल 21 जुलाई तक कुल 14 सुरक्षाकर्मी और 14 नागरिक मारे गए.

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आज से पांच साल पहले जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 अगस्त की सुबह संसद में बोलने के लिए उठे तो शायद बहुत कम लोगों को पता था कि उनका भाषण किसी बड़े स्तर का बदलाव लाएगा. दरअसल केंद्र सरकार ने 5 अगस्त साल 2019 को ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रभाव को खत्म करते हुए राज्य को 2 हिस्सों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था. इसके साथ ही इन दोनों राज्यों को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था. यह दिन पूरी घाटी के लिए ऐतिहासिक था लेकिन ये सब इतना संभव था नहीं, इस धारा को हटाते ही घाटे में इंटरनेट और फोन सेवाएं निलंबित कर दी गईं. महीनों तक यहां कर्फ्यू जैसे हालात रहे, जबकि कार्यकर्ताओं और विपक्षी सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसने आखिरकार पिछले साल इस कदम को बरकरार रखा.

एक दशक बाद अब जम्मू-कश्मीर पहली बार विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ा है. इसके लिए शीर्ष अदालत ने 30 सितंबर की समयसीमा तय की है. इस धारा को हटाने के पीछे केंद्र सरकार का मानना है कि चरमपंथियों को हटाना, आतंकवाद और पत्थरबाजी पर लगाम लगाना, आरक्षण की रक्षा, रोजगार का विस्तार, पर्यटन को बढ़ावा और बुनियादी ढांचे का निर्माण को बल मिला है.

कितनी बदली जम्मू-कश्मीर की तस्वीर?

वहीं विपक्ष का तर्क है कि इस आर्टिकल को हटा कर मानवाधिकारों को कुचल दिया, आतंकवाद को खत्म नहीं बल्कि नए रूप में लाया गया और पर्यटन की संख्या उस जमीनी भावना को छुपाती है जो अनुच्छेद 370 को हटाने और राज्य का दर्जा छीनने के खिलाफ बनी हुई है. ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि धारा 370 हटने के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर की तस्वीर कितनी बदली है.

आतंकी घटनाओं में कमी

पिछले कुछ वर्षों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं की संख्या में कमी आई है. आकड़ो की मानें तो इस साल 21 जुलाई तक कुल 14 सुरक्षाकर्मी और 14 नागरिक मारे गए, जबकि साल 2023 में केंद्र शासित प्रदेश में 46 आतंकवादी घटनाओं और 48 मुठभेड़ों या आतंकवाद विरोधी अभियानों में मारे गए लोगों की संख्या 44 थी, जिनमें 30 सुरक्षाकर्मी और 14 नागरिक शामिल थे. वहीं आंकड़ो के मुताबिक राज्य में 70 फीसदी आतंकवादी घटनाओं पर रोक लगी है. जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी केंद्र सरकार की आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का नतीजा है. अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद पहले की तुलना में शांति की बहाली और राज्य का बुनियादी विकास जमीनी तौर पर देखने को मिल रही है. अगर सुरक्षा के मोर्चे पर बात करें तो पहले की तुलना में आतंकवादी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है.

विरोध प्रदर्शन और पथराव की घटनाएं खत्म

अधिकारिक आंकड़ो की मानें तो स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और पथराव की घटनाएं खत्म हो गई है. कानून-व्यवस्था की स्थिति में काफी सुधार हुआ है. साथ ही निर्दोषों की हत्याओं पर भी रोक लगी है. नागरिक मृत्यु में 81 प्रतिशत की कमी आई है. इसके साथ ही सैनिक शहादत में यहां 48 प्रतिशत की कमी देखी गई है.

सरकार की योजनाओं का लाभ

जम्मू-कश्मीर से धारा अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद साल 2020 में राज्य में जिला विकास परिषद (डीडीसी) का चुनाव कराकर राज्य को लोकतंत्र से जोड़ने की पहल की गई. पीएम मोदी सरकार की ओर से वाल्मिकी समुदाय, माताएं, बहनें, ओबीसी, पहाड़ी, गुज्जर-बकरवाल आदि को आरक्षण का लाभ दिया गया. सशस्त्र बलों की वन रैंक, वन पेंशन की लंबे समय की मांग को भी यहां पूरा किया गया.


औद्योगिक विकास को बढ़ावा

वहीं जम्मू कश्मीर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में सदियों पुराने धार्मिक स्थलों का विकास राज्य के सांस्कृतिक पुनर्निर्माण की दिशा में अहम कदम है. जिससे पर्यटन के क्षेत्र में असीम संभावनाओं का द्वार खुलेगा. इसी कड़ी में इस साल अमरनाथ श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ इजाफा देखने को मिल रहा है. हालांकि बीते दिनों आतंकी ने इस यात्रा को भी निशाना बनाया था बावजूद श्रद्धालुओं की उत्साह कम नहीं हुई.कश्मीर में फिल्मों की शूटिंग फिर से शुरू हो गई है. 

इन क्षेत्र में विकास कार्य जारी

जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, पर्यटन, परिवहन, उद्योग, शिक्षा, हवाई अड्डे सहित लगभग हर क्षेत्र में विकास कार्य जारी है. जो राज्य के विकास के लिए अहम कड़ी है. घारा 370 हटने के बाद राज्य में आर्थिक विकास को गति मिल रही है. निजी निवेशक कश्मीर में जमीन खरीदने और कंपनियां स्थापित करने में अब दिलचस्पी दिखा रहे हैं.