नई दिल्ली: भारत में शादियों का चलन सदियों से चला आ रहा है. आज के समय इस शादी के पवित्र बंधन को अपमानित कर कई लोग इसका गलत ढंग से फायदा उठा रहे हैं. खासकर वह लोग जो सिर्फ शारीरिक सुख के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. शादी के रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा बनती है कुंडली. इसी कुंडली की दिक्कत को अपना हथियार बनाकर कई लोग फिजिक्ल रिलेशनशिप में आते हैं और फिर उनको छोड़ देते हैं. अब इसी को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. शादी का भरोसा देकर फिजिकल रिलेशनशिप बनाने के बाद कुंडली या कुंडली न मिलने की वजह से किसी महिला से शादी से मना करने पर 10 साल की सजा हो सकती है. भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सेक्शन 69 के तहत यह केस चल सकता है.
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह बात एक ऐसे आदमी की बेल अर्जी खारिज करते हुए कही, जिस पर कुछ समय तक एक महिला के साथ फिजिकल रिलेशनशिप बनाने और बाद में जन्म कुंडली न मिलने का हवाला देकर उससे शादी करने से मना करने का आरोप है. बता दें कि आरोपी 4 जनवारी से ज्यूडिशियल कस्टडी में मौजूद है. उसने रेगुलर बेल मांगते हुए दलील दी थी.
दलील में उसक कहना था कि रिश्ता आपसी सहमति से हुआ था और दोनों एक-दूसरे को करीब आठ साल से जानते थे. उसके वकील ने कहा कि यह मामला शादी का झूठा वादा करके रेप करने जैसा नहीं है और क्रिमिनल चार्ज सही नहीं हैं. हालांकि, हाई कोर्ट इससे सहमत नहीं था.
कोर्ट के 17 फरवरी के ऑर्डर के मुताबिक, महिला ने शुरू में नवंबर 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी. बाद में आरोपी और उसके परिवार के कथित तौर पर शादी का भरोसा दिलाने के बाद उसने शिकायत वापस ले ली. इसके बाद, आरोपी ने यह कहते हुए उससे शादी करने से मना कर दिया कि उनकी 'कुंडलियां' मैच नहीं कर रही हैं.
इसके बाद, जनवरी 2026 में IPC के सेक्शन 376 (रेप) और BNS के सेक्शन 69 के तहत एक नई FIR दर्ज की गई, जो झूठे वादों सहित धोखे से हासिल किए गए सेक्सुअल इंटरकोर्स को क्रिमिनल बनाता है. कोर्ट ने कहा कि यह रिश्ता टूटने का कोई आसान मामला नहीं था.
इसमें कहा गया कि आरोपी के बार-बार यह भरोसा दिलाने पर कि शादी में कोई रुकावट नहीं है, जिसमें कुंडली कम्पैटिबिलिटी भी शामिल है, फिजिकल रिलेशन बनाए गए थे. जज ने बताया कि आरोपी को अपने परिवार के कुंडली मैचिंग पर जोर देने के बारे में पता था, लेकिन वह महिला को इसके उलट भरोसा दिलाता रहा. कोर्ट ने कहा, "इस बात से कोई झगड़ा नहीं हो सकता कि सिर्फ इसलिए क्रिमिनल लॉ लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि कोई रिश्ता टूट जाता है या शादी नहीं हो पाती. हालांकि, इस स्टेज पर मौजूदा मामला एक अलग नजरिए पर है."
बेंच ने आगे कहा कि पहले किए गए वादों के बावजूद, बाद में कुंडली न मिलने के आधार पर शादी से इनकार करना, दिए गए भरोसे की असलियत पर गंभीर सवाल खड़े करता है. कोर्ट ने कहा कि इस स्टेज पर, ऐसा बर्ताव BNS के सेक्शन 69 के तहत आएगा. जमानत याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपों की प्रकृति, जांच के दौरान इकट्ठा किए गए मटीरियल और इस बात को देखते हुए कि चार्जशीट अभी तक फाइल नहीं हुई है, वह राहत देने के पक्ष में नहीं है.