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अब 'फुटबॉल' के साथ सियासत के मैदान में किक मारेंगी ममता! मिला नया चुनाव चिन्ह; यहां जानें

पश्चिम बंगाल की सियासत में टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी कलह के बाद चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने पार्टी के पुराने नाम और 'फूल-घास' वाले पारंपरिक निशान को फ्रीज कर दिया है.

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Edited By: Reepu Kumari
अब 'फुटबॉल' के साथ सियासत के मैदान में किक मारेंगी ममता! मिला नया चुनाव चिन्ह; यहां जानें
Courtesy: Pinterest and @sdo_ojha

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. टीएमसी के दो फाड़ होने के बाद पार्टी के नाम और निशान की लड़ाई अब चुनाव आयोग के फैसले तक पहुंच गई है. आगामी उपचुनावों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने मूल दल की पहचान को अस्थाई रूप से रोक दिया है. इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नए नाम और चुनाव सिंबल देकर राजनीतिक मैदान में उतरने की अनुमति दी गई है.

मैदान में उतरी नई पहचान

चुनाव आयोग के फैसले के बाद ममता बनर्जी गुट के नए सिंबल का स्वरूप पूरी तरह सामने आ गया है. इस नए चुनाव निशान में बैकग्राउंड में राष्ट्रीय तिरंगा लहराता दिख रहा है, जिसके सामने एक फुटबॉल खिलाड़ी किक मारते हुए नजर आ रहा है. निशान के ऊपर 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' साफ लिखा है. ममता का फुटबॉल से पुराना और गहरा लगाव रहा है, इसलिए यह नया निशान उनके राजनीतिक मिजाज से काफी मेल खाता है.

आयोग को भेजे गए थे तीन विकल्प

विवाद गहराने पर आयोग ने दोनों गुटों से तीन-तीन नाम और तीन-तीन सिंबल के विकल्प ईमेल से मांगे थे. ममता कैंप की ओर से दिए गए विकल्पों में प्रार्थना, क्रिकेट बैट और फुटबॉल का नाम शामिल था, जबकि स्लोगन के तौर पर 'खेला होबे' का जिक्र था. दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के बागी गुट ने भी अपनी पसंद आयोग को भेजी थी. विचार-विमर्श के बाद आयोग ने बागी धड़े को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' सिंबल अलॉट कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट पहुंची कानूनी लड़ाई

मूल सिंबल और नाम सीज होने के फैसले से ममता बनर्जी बेहद खफा हैं. उन्होंने आयोग के इस कदम को सीधे देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है. ममता ने अपनी पार्टी के पारंपरिक निशान के छिनने की तुलना एक मां के अपने बच्चे को खोने से की. उन्होंने साफ कर दिया है कि वे इसे अंतरिम समझौता मानकर चुप नहीं बैठेंगी और अपने मूल 'फूल-घास' निशान को वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी.

उपचुनाव के लिए अंतरिम व्यवस्था

आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को देखते हुए ही आयोग ने यह अस्थाई व्यवस्था लागू की है. पैरा 15 के तहत अंतिम निर्णय आने तक कोई भी गुट मूल पार्टी का नाम या आरक्षित निशान इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. दोनों ही धड़े अब अपने नए आबंटित सिंबल और नए नाम के साथ चुनावी प्रचार में उतरेंगे. बहरहाल, बंगाल की जनता इस नए राजनीतिक समीकरण को किस नजरिए से देखती है, यह उपचुनाव के नतीजे ही तय करेंगे.