पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय सुप्रीम कोर्ट पहुंची है. ईडी द्वारा 17 मामलों में सीबीआई जांच की मांग की गई है. जिसमें 8 जनवरी को आई-पैक के अधिकारियों के घर में हो रही छापेमारी के दौरान सीएम बनर्जी द्वारा गंभीर बाधा डालने के संबंध में भी है.
ईडी ने आरोप लगाया है कि राज्य की मुख्यमंत्री बनर्जी ने छापेमारी के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ की और डिजिटल उपकरणों सहित महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन छीन लिए. यह कार्रवाई अवैध कोयला खनन से जुड़े 2,742 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा थी.
दरअसल, ईडी ने 8 जनवरी को आई-पैक चीफ प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर तलाशी कर रही थी. ईडी ने सुबह से ही छापेमारी शुरू कर दी थी और शांतिपूर्ण तरीके से जारी थी. इसमें हवाला नेटवर्क के माध्यम से कोयला तस्करी से प्राप्त अवैध धन को आई-पैक तक पहुंचाने का आरोप था. छापेमारी के दौरान दोपहर 12:05 बजे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचीं. उन्होंने ईडी अधिकारियों को धमकाया, गलत तरीके से रोक दिया और जब्त लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क तथा दस्तावेजों को ट्रक में भरकर ले गईं. ईडी ने इसे अभूतपूर्व और चौंकाने वाला बताया, क्योंकि कानून के रक्षक खुद गंभीर अपराधों में शामिल हो गए.
ईडी ने याचिका में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत 17 संज्ञेय अपराधों का जिक्र किया है. जिनमें डकैती, चोरी, सरकारी अधिकारी को ड्यूटी से रोकने के लिए बल प्रयोग, सबूत नष्ट करना और आपराधिक धमकी शामिल हैं. एजेंसी ने कहा कि मुख्यमंत्री, जो गृह मंत्री भी हैं और पुलिस अधिकारी जांच को बाधित करने में शामिल थे. ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि जब्त सामग्री तुरंत वापस सौंपी जाए, फोरेंसिक जांच हो और मामले की सीबीआई से जांच कराई जाए.
ईडी ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी, लेकिन मुख्यमंत्री के समर्थकों द्वारा अदालत में हंगामा करने से सुनवाई 14 जनवरी तक टल गई. ईडी का दावा है कि व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था. राज्य पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज करने के बाद एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से सुरक्षा की मांग की है.