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India Daily

भूकंप के भीषण झटकों से कांपा जम्मू कश्मीर का कुपवाड़ा जिला, रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई है तीव्रता

उत्तरी भारत के इन क्षेत्रों में हाल के दिनों में भूकंपीय गतिविधियों में तेजी से बढ़ोत्तरी देखी गई है. इस बीच एक्सपर्ट का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है, और ऐसी घटनाएं सामान्य हैं. हालांकि, इन भूकंपों से किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें सतर्क हैं.

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Edited By: Mayank Tiwari
भूकंप के भीषण झटकों से कांपा जम्मू कश्मीर का कुपवाड़ा जिला, रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई है तीव्रता
Courtesy: X

जम्‍मू-कश्‍मीर के कुपवाड़ा जिले में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, गुरुवार (21 अगस्त) के कुपवाड़ा जिले में 3.5 तीव्रता का भूकंप आया. बता दें कि, यह भूकंप दोपहर 1:39 बजे दर्ज किया गया, जिसकी गहराई 5 किलोमीटर थी. दरअसल, यह लगातार दूसरे दिन दूसरा भूकंप है, जिसने जम्मू-कश्मीर के लोगों को डर के साये में जीने के लिए मजबूर कर दिया है. इस घटना के बाद किसी तरह के नुकसान की कोई तत्काल जानकारी नहीं मिली है.

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर एक पोस्ट शेयर किया. जिसमें कहा गया कि ईक्यू ऑफ एम: 3.5, दिनांक 21/08/2025 13:41:33 IST, अक्षांश: 34.68 एन, देशांतर: 74.39 ई, गहराई: 5 किमी थी. वहीं, जम्मू कश्मीर के कुपवाडा जिले में हुआ.

डोडा में भूकंप से मचा हाहाकार

हालांकि, इससे एक दिन पहले डोडा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. वहीं, भूकंप का केंद्र डोडा क्षेत्र में सतह से 5 किमी नीचे स्थित था. भूकंप के झटके महसूस होते ही स्थानीय लोग फौरन घरों से बाहर निकल आए. बता दें कि, डोडा इलाका पहले भी भूकंप की गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है. ऐसे में प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है.

हिमाचल प्रदेश में भी आए भूकंप के झटके

 हालांकि, इससे पहले, बुधवार को हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में दो भूकंपों ने दस्तक दी. जिसमें पहला भूकंप 4.0 तीव्रता का था, जो सुबह 4:39 बजे आया और इसकी गहराई 10 किलोमीटर थी. इसके अलावा, उसी दिन सुबह 3:27 बजे 3.3 तीव्रता का एक और भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी गहराई 20 किलोमीटर थी. चंबा जिला भूकंप जोन-5 में आता है, जो सबसे संवेदनशील कैटागिरी होती है. ऐसे में यहां भूकंप का खतरा हमेशा बना रहता है. गौरतलब है कि, हाल के दिनों में हुई भारी बारिश और लैंडस्लाइड ने हालात को और भी नाजुक बना दिया है.