menu-icon
India Daily

'पुरानी गाड़ियों के लिए मिलना चाहिए E10 पेट्रोल', E20 के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सरकार को दिया सुझाव

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने पुरानी गाड़ियों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 ईंधन का विकल्प फिर शुरू करने की सलाह दी है. नए वाहनों में E20 जारी रखने का सुझाव दिया.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
'पुरानी गाड़ियों के लिए मिलना चाहिए E10 पेट्रोल', E20 के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार ने सरकार को दिया सुझाव
Courtesy: social media

नई दिल्ली: देश में E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने बीच का रास्ता सुझाया है. उनका कहना है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को रोकने के बजाय पुरानी और नई गाड़ियों की जरूरत के हिसाब से अलग ईंधन विकल्प उपलब्ध कराए जाने चाहिए.

पुरानी गाड़ियों को मिले E10 का विकल्प

नागेश्वरन ने अपने लेख में कहा कि पेट्रोल पंपों पर E20 के साथ E10 भी उपलब्ध कराया जा सकता है. इससे उन वाहन मालिकों को राहत मिलेगी, जिनकी पुरानी गाड़ियां अधिक इथेनॉल मिश्रण के लिए तैयार नहीं हैं. देश में करीब 7.5 से 8 करोड़ पुराने दोपहिया वाहन बताए जाते हैं, जिनमें खासतौर पर पुराने कार्बोरेटर वाले मॉडल शामिल हैं. ऐसे वाहनों में E20 के इस्तेमाल को लेकर तकनीकी चिंताएं ज्यादा हैं.

माइलेज में कमी, लेकिन इंजन खराब होने का दावा नहीं

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने E20 को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ दावों को भी खारिज किया है. उनके मुताबिक यह कहना सही नहीं है कि E20 इस्तेमाल करते ही इंजन खराब होने लगते हैं या माइलेज में 30 फीसदी तक गिरावट आती है. इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होने के कारण E20 से माइलेज में करीब 6 से 7 फीसदी की कमी हो सकती है. हालांकि पुराने वाहनों में ईंधन प्रणाली के कुछ हिस्सों पर असर की आशंका बनी रहती है.

पुराने इंजन में क्यों बढ़ सकती है परेशानी

पुराने कार्बोरेटर इंजन ईंधन में मौजूद अतिरिक्त ऑक्सीजन के अनुसार खुद को आधुनिक इंजनों की तरह समायोजित नहीं कर पाते. इससे इंजन के ज्यादा गर्म होने की समस्या पैदा हो सकती है. इसके अलावा पुरानी रबर सील और ईंधन प्रणाली के दूसरे हिस्से इथेनॉल के संपर्क में लंबे समय तक रहने पर जल्दी खराब हो सकते हैं. इसी वजह से पुराने वाहनों के लिए कम इथेनॉल वाला विकल्प उपलब्ध रखना व्यावहारिक कदम माना जा रहा है.

E20 से आगे बढ़ने से पहले भोजन पर भी नजर

नागेश्वरन ने इथेनॉल नीति को केवल वाहनों तक सीमित न रखते हुए खाद्य सुरक्षा से भी जोड़कर देखा है. उनका कहना है कि अगर भारत E27 या E30 जैसे ऊंचे मिश्रण स्तर की ओर बढ़ता है, तो मक्का, गन्ने और दूसरे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी. इससे खेती की जमीन और पानी का इस्तेमाल ईंधन उत्पादन की ओर जा सकता है. इसलिए भविष्य की नीति बनाते समय भोजन और ईंधन की जरूरतों के बीच संतुलन का लागत-लाभ आकलन जरूरी होगा.