नई दिल्ली: दो छोटे चार्टर विमान हादसों में 12 लोगों की मौत के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसी पृष्ठभूमि में Directorate General of Civil Aviation ने नॉन शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट यानी NSOP और प्राइवेट जेट कंपनियों पर सख्ती बढ़ाने का फैसला किया है. नियामक अब इन ऑपरेटरों की सेफ्टी रैंकिंग तैयार कर अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगा, ताकि यात्रियों को चार्टर सेवा चुनते समय पूरी जानकारी मिल सके.
DGCA ने निर्देश दिया है कि सभी NSOP ऑपरेटर अपनी वेबसाइट पर विमान की उम्र, मेंटेनेंस इतिहास और पायलट अनुभव जैसी अहम जानकारी साझा करें. उद्देश्य यह है कि ग्राहक जिस विमान को चार्टर कर रहे हैं, उसके सुरक्षा मानकों से पूरी तरह अवगत रहे. सेफ्टी रिकॉर्ड के आधार पर रैंकिंग से कंपनियों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव बनेगा.
फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन का उल्लंघन करने या सुरक्षा मानकों से नीचे लैंडिंग की कोशिश करने वाले पायलटों पर पांच साल तक लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई हो सकती है. वहीं, नियमों का पालन न करने वाले ऑपरेटरों के लाइसेंस भी सस्पेंड किए जाएंगे. नियामक ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा.
हालिया बैठक में पाया गया कि कई घटनाओं की जड़ में SOP का पालन न करना, कमजोर फ्लाइट प्लानिंग और प्रशिक्षण की कमी है. कुछ कंपनियां अपने स्तर पर मेंटेनेंस कर रही थीं, जो मानकों के अनुरूप नहीं था. अब ऐसी कंपनियों को मान्यता प्राप्त MRO से ही रखरखाव कराना होगा. पुराने विमानों और मालिकाना हक बदलने वाले विमानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी.
DGCA ने दो टूक कहा है कि सुरक्षा, व्यावसायिक हितों से ऊपर रहेगी. इसके अलावा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की रैंडम जांच, ईंधन रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग की क्रॉस जांच भी बढ़ाई जाएगी. जवाबदेही केवल पायलट पर नहीं, बल्कि वरिष्ठ प्रबंधन पर भी तय होगी.
नियामक का मानना है कि कई मौसम संबंधी हादसे खराब निर्णय का परिणाम होते हैं. ऑपरेटरों को रियल टाइम वेदर अपडेट सिस्टम अपनाने और पायलटों को नियमित प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कहा कि या तो 100 प्रतिशत अनुपालन करें, या लाइसेंस छोड़ दें. अब चार्टर सेक्टर को सख्त अनुशासन में लाने की तैयारी है.