Delhi News: उत्तराखंड टनल में फंसे 41 मजदूरों का रेस्क्यू करने वाली टीम का नेतृत्व करने वाले शख्स के घर पर बुलडोजर चलाया गया है. दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई का हवाला देते हुए ये कार्रवाई की है. टनल में 17 दिनों से फंसे मजदूरों के रेस्क्यू में रैट माइनर्स की टीम ने अहम भूमिका निभाई थी. इस टीम का नेतृत्व वकील हसन ने किया था. बुधवार को DDA की टीम वकील हसन के घर पहुंची और उनके घर पर बुलडोजर चला दिया.
DDA के मुताबिक, उन्होंने पूर्वोत्तर दिल्ली के खजूरी खास गांव में अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया. हसन ने द हिंदू से बात करते हुए कहा कि मुझे बुलडोजर कार्रवाई का कोई नोटिस नहीं दिया गया था, जिस क्षेत्र में हम रहते हैं, वो एक कॉलोनी है. मैंने 2012-13 में अपना घर बनाया था लेकिन डीडीए सुबह 9 बजे अचानक आया और बुलडोजर कार्रवाई की. वकील हसन ने कहा कि कार्रवाई के दौरान मैं और मेरी पत्नी घर पर नहीं थे. केवल मेरे तीन बच्चे ही घर पर थे. जब तोड़फोड़ चल रही थी तो बच्चे डरे हुए थे. अधिकारियों ने हमारे आने का भी इंतजार नहीं किया.
वकील हसन ने कहा कि मुझे नहीं पता कि अब कहां जाना है. मुझे इतने कम समय में किराये पर घर नहीं मिलेगा, मेरे बच्चे और परिवार आज रात कहाँ जायेंगे? वकील हसन ने ये भी कहा कि जब मैं मौके पर पहुंचा तो मुझे पास के पुलिस स्टेशन ले जाया गया और उन्होंने मेरा फोन छीन लिया. उधर, पूर्वोत्तर दिल्ली के लोकसभा सांसद मनोज तिवारी ने बुलडोजर कार्रवाई का संज्ञान लिया. उन्होंने कहा कि मैं पहले ही मामले की जांच कर चुका हूं. मैं ये सुनिश्चित करूंगा कि वकील हसन को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से मुआवजा मिले.
डीडीए के सूत्रों के मुताबिक, जमीन पहले किसी डवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए अथॉरिटी की ओर से अधिग्रहित की गई थी और उस पर अतिक्रमण कर लिया गया था. अतिक्रमण के बाद हमने बुलडोजर कार्रवाई की है. वहीं, डीडीए सदस्य और आप नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि वह भी इस मामले को देखेंगे और देखेंगे कि क्या कोई समाधान निकाला जा सकता है.
उत्तरकाशी सुरंग के बचावकर्मी तब सुर्खियों में आए जब उन्होंने सिल्कयारा-बड़कोट सुरंग से 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकाला था. 'रैट माइनर्स' के 12 सदस्यों की एक टीम ने 17 दिनों तक फंसे रहने वाले मजदूरों के रेस्क्यू में अहम भूमिका निभाई थी. वकील हसन रैट माइनर्स टीम का नेतृत्व कर रहे थे. रेस्क्यू की सफलता के बाद जब वकील हसन दिल्ली लौटे थे, तब लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया था. वे पूर्वोत्तर दिल्ली के खजूरी खास इलाके के श्रीराम कॉलोनी में घर बनाकर रह रहे थे.
45 साल के वकील हसन के मुताबिक, वे रैट माइनर्स को रोजगार देने वाली कंपनी रॉकवेल एंटरप्राइजेज के भी मालिक हैं. हसन ने दावा किया कि इलाके में केवल उसके घर को ही निशाना बनाया गया है. जहां उनका घर है, वहां कई अन्य लोगों के भी मकान बने हुए हैं. लेकिन सिर्फ मेरा घर ही तोड़ा गया है. उन्होंने बताया कि रजिस्ट्री 1987 की है और हम 2012 से यहां रह रहे हैं. मेरा मकान 80 गज के प्लॉट पर बना है.