Independence Day 2026 Narendra Modi

स्वतंत्रता दिवस समारोह से लगातार दूसरी बार खरगे और राहुल गांधी रहे नदारद, राजनीतिक दूरी पर उठे सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए.

Pinterest
Km Jaya

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार दूसरे साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए. 15 अगस्त 2026 को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले में आयोजित मुख्य समारोह में दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही.

इससे पहले 2025 में भी खरगे और राहुल गांधी स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में शामिल नहीं हुए थे. लगातार दूसरे साल समारोह से दूरी ऐसे समय पर सामने आई है, जब केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी और विपक्ष के बीच राजनीतिक संबंधों में काफी तनाव देखने को मिल रहा है.

क्या थी इसकी वजह?

राहुल गांधी के समारोह में शामिल होने को लेकर 2024 में भी विवाद हुआ था. उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखने वाले राहुल गांधी को लाल किले पर आयोजित समारोह में पीछे की पंक्ति में बैठाया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, वह दूसरी आखिरी पंक्ति में बैठे थे. इसे लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई थी.


राहुल गांधी को लेकर विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्ष ने राहुल गांधी के लिए निर्धारित सीट को लेकर इसे कांग्रेस और देश की जनता का अपमान बताया था. दूसरी ओर, समारोह का आयोजन करने वाले रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि परिसर में ओलंपिक पदक विजेताओं को बैठाने के लिए बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया था. सामान्य प्रोटोकॉल के अनुसार, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को ऐसे महत्वपूर्ण सरकारी और संवैधानिक समारोहों में आगे की पंक्ति में स्थान दिया जाता है.

2024 के विवाद के बाद भी राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच कई मुद्दों पर राजनीतिक मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं. इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह से उनकी गैरमौजूदगी ऐसे समय में हुई है, जब संसद के मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला.

कब खत्म हुआ संसद का मानसून सत्र?

संसद का मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त हुआ. इस दौरान सदन की कार्यवाही और उत्पादकता को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे. सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च से जुड़े घटनाक्रम के बीच हुई थी.

इस मानसून सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए. हालांकि, विस्तृत चर्चा केवल एक विधेयक पर हुई, जो परीक्षा में पेपर लीक से संबंधित था. कम कार्यवाही और कम चर्चा को लेकर दोनों पक्षों ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया.