नई दिल्ली: महाराष्ट्र में 2024 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सीट-बंटवारा इंडिया गठबंधन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है. बीते दिनों सीट सीट शेयरिंग फार्मूले को लेकर कांग्रेस और शिवसेना के नेता आमने- सामने आ गए. अब इस सियासी घटनाक्रम के बीच एक नया टर्न एंड ट्विस्ट सामने आया है.
शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कल ही मेरी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत हुई है. महाराष्ट्र के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने एक कमेटी की स्थापना की है. महाविकास आघाडी के घटक दलों के बीच सीट बंटवारे के मुद्दे पर कोई खींचतान नहीं है. शिवसेना-यूबीटी और दिल्ली के साथ-साथ महाराष्ट्र में कांग्रेस के नेताओं के बीच अच्छी समझ है. महाराष्ट्र में एनसीपी,कांग्रेस और शिवसेना साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. हम अपनी सीट की सूची के साथ तैयार हैं और टिकट उन उम्मीदवारों को दिया जाएगा जिनमें चुनाव जीतने की क्षमता होगी.
दरअसल बीते दिनों शिव सेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा था कि यह महाराष्ट्र है और शिवसेना यहां की सबसे बड़ी पार्टी है. कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है. उद्धव ठाकरे निर्णय लेने के साथ सकारात्मक चर्चा कर रहे हैं. हमने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल सहित कांग्रेस के नेताओं से कहा है कि शिवसेना हमेशा दादरा और नगर हवेली सहित लोकसभा चुनाव में 23 सीटों पर लड़ती रही है और हम इस रुख पर कायम है. सीट बंटवारे पर हम सिर्फ दिल्ली के कांग्रेस नेताओं से बात करेंगे, महाराष्ट्र के स्थानीय नेताओं से नहीं.
संजय राउत के बयान पर जवाबी पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि रोजाना होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस और सामना में लिखे जाने वाले आर्टिकल के चलते शिवसेना (यूबीटी) ने बीजेपी के साथ नाता तोड़ा, क्या आप कांग्रेस के साथ भी ऐसा ही करना चाहते हैं? राउत को प्रेस कॉन्फ्रेंस और सामना में गठबंधन दलों के खिलाफ लिखना बंद करना चाहिए. कांग्रेस पार्टी के बिना शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा में एक भी सीट नहीं जीत सकती है. सीट बंटवारा अभी पूरा नहीं हुआ है. इसकी चर्चा टीवी पर नहीं होनी चाहिए. तीनों दलों के नेताओं को एक साथ बैठकर चर्चा करने और मेरिट के आधार पर फैसला लेने की जरूरत है.