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वादा पूरा करे सरकार... सुप्रीम कोर्ट के सामने CJP ने पहले ही रख दी ये शर्त

CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने सरकार से सभी एफआईआर रद्द करने का भरोसा पूरा करने की मांग की है. उन्होंने प्रस्तावित कमिटी को स्वतंत्र और पारदर्शी बनाने की मांग की.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
वादा पूरा करे सरकार... सुप्रीम कोर्ट के सामने CJP ने पहले ही रख दी ये शर्त
Courtesy: X

CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कमिटी के गठन को लेकर अपनी मांगें सामने रखी हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन खत्म होने के एक सप्ताह के भीतर सभी एफआईआर रद्द करने का भरोसा दिया था. अब वह इसी भरोसे को पूरा करने की मांग कर रही हैं.

कमिटी स्वतंत्र हो और सभी नाम सार्वजनिक किए जाएं

रत्ना सिंह ने कहा कि अगर सरकार कमिटी का गठन करती है तो उसकी प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए. उनका कहना है कि कमिटी में शामिल सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि लोगों को इसकी जानकारी साफ तौर पर मिल सके. सिंह ने यह भी कहा कि सीजेपी के सदस्यों को कमिटी में शामिल किया जाना चाहिए. इससे कमिटी के सामने रखी जाने वाली जानकारी का सीजेपी की ओर से भी सत्यापन किया जा सकेगा. उनके मुताबिक, सिर्फ कमिटी बनाने से ज्यादा जरूरी उसकी स्वतंत्रता और काम करने की पारदर्शी व्यवस्था है.

एफआईआर रद्द करने के भरोसे पर जोर

रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि प्रदर्शन से जुड़े सभी एफआईआर रद्द किए जाएंगे. उनका कहना है कि उनकी उम्मीद थी कि प्रदर्शन समाप्त होने के एक सप्ताह के भीतर इस दिशा में कार्रवाई हो जाएगी. अब कमिटी बनाने की बात सामने आने के बाद भी उनकी प्राथमिक मांग वही है कि सरकार पहले दिए गए भरोसे को पूरा करे. उन्होंने साफ किया कि प्रदर्शन के बाद जिन लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई हैं, उनके मामले में सरकार को अपने वादे के मुताबिक कदम उठाना चाहिए.

‘हमें उच्च स्तरीय कमिटी नहीं, भरोसा पूरा होना चाहिए’

रत्ना सिंह ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह किसी उच्च स्तरीय कमिटी की मांग नहीं कर रही हैं. उनकी प्राथमिकता यह है कि सरकार ने जो भरोसा दिया था, उसे पूरा किया जाए. हालांकि, अगर कमिटी बनाई जाती है तो वह चाहती हैं कि उसकी पूरी प्रक्रिया खुली और स्वतंत्र हो तथा सीजेपी को भी उसमें उचित जगह मिले. उनका कहना है कि इससे कमिटी के काम और उसके सामने रखी जाने वाली जानकारी की जांच संभव होगी. सिंह ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि एफआईआर रद्द करने के भरोसे पर आगे कब और कैसे कार्रवाई की जाएगी.