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मस्क की कंपनी Tesla को क्यों दाना डाल रही भारत सरकार? जान लीजिए अंदर की बात

Tesla News: भारत सरकार के साथ-साथ कई राज्य सरकारें ईवी निर्माता कंपनी टेस्ला को लुभावने ऑफर दे रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारों की कोशिश है कि टेस्ला के कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों की इकाई उनके राज्य में स्थापित हो सकें. इससे उत्पादन में तेजी आएगी और लॉजिस्टिक खर्च में भी बचत होगी.

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मस्क की कंपनी Tesla को क्यों दाना डाल रही भारत सरकार? जान लीजिए अंदर की बात
Courtesy: Social Media

Tesla News: भारत सरकार और कई राज्य दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं. इकनॉमिक टाइम्स ने अज्ञात स्रोतों का हवाला देते हुए बताया कि केंद्र सरकार टेस्ला को भारत में विनिर्माण के लिए लुभाने की भरपूर कोशिश कर रही है. गुजरात और तमिलनाडु जैसी राज्य सरकारें भी टेस्ला के उत्पाद बनाने वाले आपूर्तिकर्ताओं को अपने राज्यों में लाने की कोशिश कर रही हैं. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि उत्पादन में तेजी लाने और परिवहन पर खर्च होने वाले समय और लागत को बचाने के लिए टेस्ला द्वारा वहां निर्माण करने की अधिक संभावना हो सकती है जहां उसका आपूर्तिकर्ता पारिस्थितिकी तंत्र है.

तमिलनाडु विर्निमाण केंद्र का हब

रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ला के साथ-साथ अन्य वाहन निर्माताओं के तीन कंपोनेंट सप्लायर गुजरात में थे. इसमें से दो यूरोपीय सप्लायर तमिलनाड़ु में अपनी इकाई स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. तमिलनाडु पहले से ही एक ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र का एक हब बन चुका है वहां टेस्ला के कुछ सप्लायर्स पहले से ही मौजूद हैं.जो धातु के कंपोनेंट का उत्पादन करते हैं और रबर के पार्ट का उत्पादन संयुक्त रूप से एक जर्मन कंपनी करती है. 

चीनी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप 

रिपोर्ट में काउंटरपॉइंट रिसर्च के वरिष्ठ अनुसंधान विश्लेषक सौमेन मंडल के हवाले से कहा गया है कि टेस्ला ने बैटरी के लिए चीन की BYD और CATL के साथ तथा अमेरिका में पैनासोनिक और LG एनर्जी के साथ साझेदारी की है. उन्होंने कहा कि टेलीमेटिक्स, पावर केबल, एलईडी लाइट्स और डिस्प्ले जैसे घटकों के लिए इसी प्रकार की रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला साझेदारियां वैश्विक स्तर पर मौजूद हैं.

भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

कैनालिस के ऑटोमोटिव विश्लेषक अश्विन अम्बरकर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह भारत के लिए फायदेमंद है क्योंकि चीन पर अमेरिकी निर्माताओं की निर्भरता कम होने से भारत बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए एक विश्वसनीय साझेदार बन गया है.