रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार हुआ भारतीय सेना का अधिकारी, CBI ने की कार्रवाई

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सेना के टेंडरों में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के बड़े मामले में कोलकाता में तैनात कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार किया है. इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: भारतीय सेना के टेंडरों में भ्रष्टाचार का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देश की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए सेना के वरिष्ठ अधिकारी कर्नल हिमांशु बाली को गिरफ्तार कर लिया है. कर्नल बाली कोलकाता के फोर्ट विलियम्स स्थित ईस्टर्न कमांड में आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स के बेहद महत्वपूर्ण पद पर तैनात थे. जांच एजेंसी ने इस गिरफ्तारी से पहले एफआईआर दर्ज की थी.

जांच एजेंसी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक, यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित एक प्रतिष्ठित कंपनी 'ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड' के संचालकों से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि इस कंपनी के प्रमोटरों ने सेना के बड़े टेंडर हासिल करने के लिए भारी रिश्वत दी थी. सीबीआई की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि कंपनी को नियमों को ताक पर रखकर कई सरकारी टेंडरों में अवैध रूप से लाभ पहुंचाया गया था.

घटिया सैंपल पास कराने का आरोप

सीबीआई के अनुसार, कर्नल बाली ने कंपनी को टेंडर आवंटित कराने, आपूर्ति किए जाने वाले सामान के घटिया सैंपल को स्वीकृत करने और मनमाने ढंग से बढ़ाए गए बिलों को बिना किसी अड़चन के पास कराने के एवज में बड़ी रकम वसूली थी. जांच में पता चला है कि मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान एक बड़ा टेंडर इसी रिश्वतखोरी के दम पर पास कराया गया था.

सीबीआई की के मुताबिक, 22 अप्रैल 2026 को कोलकाता के प्रसिद्ध पार्क स्ट्रीट इलाके में कर्नल हिमांशु बाली और आरोपी कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच एक बेहद गोपनीय बैठक हुई थी. इस मुलाकात के ठीक दो दिन बाद यानी 24 अप्रैल को संबंधित टेंडर उस कंपनी के नाम कर दिया गया. कर्नल ने 16 मई 2026 को रिश्वत की बकाया राशि मांगी थी.

हवाला के जरिए लेनदेन

जांच एजेंसी के रडार पर आए इस सिंडिकेट के वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई अन्य तथ्य भी सामने आए हैं. जांच के अनुसार, भ्रष्टाचार के इस खेल की करीब 50 लाख रुपये की मोटी रकम को हवाला नेटवर्क के जरिए दिल्ली-एनसीआर में ठिकाने लगाने की पूरी तैयारी की जा रही थी. इस मामले में कर्नल के अलावा अक्षत अग्रवाल, मयंक अग्रवाल, आशुतोष शुक्ला और नरेश पाल को भी मुख्य आरोपी बनाया गया है.

सीबीआई के डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में इस पूरे भ्रष्टाचार नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं. सभी नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत गंभीर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सेना की आंतरिक खरीद प्रणाली और सुरक्षा ऑडिट को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.