'बेरोजगार युवक, संकट में किसान', राहुल गांधी ने आम बजट को बताया निराशाजनक; मोदी-शाह ने क्या कहा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नौवें बजट भाषण के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. प्रधानमंत्री ने इसे ऐतिहासिक बताया है, जबकि राहुल गांधी समेत विपक्ष के अन्य नेताओं ने इसे युवाओं और किसानों की अनदेखी करने वाला बजट कहा है.
नई दिल्ली: देश की संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के साथ ही एक नई आर्थिक बहस छिड़ गई है. टीवी स्क्रीन से लेकर स्मार्टफोन के यूट्यूब फीड तक, हर जगह केवल बजट के आंकड़ों और प्रावधानों का विश्लेषण किया जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जहां इसे भविष्यवादी बताया, वहीं राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इसे जमीनी हकीकतों से दूर बताया है.
राहुल गांधी की युवाओं और किसानों पर चिंता
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर कड़ा हमला बोला है. उन्होंने X पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि इस बजट में युवाओं की नौकरियों, गिरते निवेश और किसानों के संकट जैसे गंभीर मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है. गांधी के अनुसार, सरकार देश के वास्तविक संकटों से आंखें मूंदे हुए है और यह बजट सुधार की दिशा को बदलने में विफल रहा है. उन्होंने इसे गिरती घरेलू बचत और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अत्यंत निराशाजनक और दिशाहीन करार दिया है.
अपने पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा- 'नौकरियों से वंचित युवा. गिरती हुई मैन्युफैक्चरिंग. निवेश वापस निकालते इन्वेस्टर. घरेलू बचत में तेज गिरावट. संकट में किसान. मंडराते वैश्विक झटके- सब कुछ नजरअंदाज. ऐसा बजट जो सुधार की दिशा बदलने से इनकार करता है और भारत के वास्तविक संकटों से आंखें मूंदें हुए है.
प्रधानमंत्री मोदी की विकसित भारत की नींव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बजट की सराहना करते हुए इसे 'ऐतिहासिक' करार दिया है. उनके अनुसार, यह बजट देश की नारी शक्ति का एक सशक्त प्रतिबिंब है. उन्होंने कहा कि यह बजट 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है. पीएम मोदी ने इसे अवसरों का राजमार्ग बताते हुए विश्वास जताया कि यह भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस को नई ऊर्जा और गति प्रदान करेगा. प्रधानमंत्री के अनुसार यह आज की आकांक्षाओं को वास्तविकता में बदलने वाला बजट है.
अमित शाह का आत्मनिर्भर आर्थिक दृष्टिकोण
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट भारत को एक उभरती हुई वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करता है. शाह ने प्रधानमंत्री की दूरदर्शी नीतियों की तारीफ की और कहा कि कोविड के बाद की चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को इस बजट से और मजबूती मिलेगी. उनके अनुसार, भारत अब पारंपरिक और नए जमाने के क्षेत्रों में निवेश के लिए दुनिया का सबसे आकर्षक स्थान बन गया है जो अपनी क्षमताओं पर भरोसा कर रहा है.
अखिलेश यादव का बजट पर कड़ा रुख
विपक्षी एकता के सुर में सुर मिलाते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी बजट पर अपनी तीखी बात रखी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बजट 2026 आम लोगों की समझ से बिल्कुल बाहर है. विपक्ष का मानना है कि बजट में उन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं है जो देश का आम नागरिक आज झेल रहा है. राजनीतिक गलियारों में इस टिप्पणी को बजट की जटिलता और जनविरोधी नीतियों के एक स्पष्ट संकेत के रूप में देखा और समझा जा रहा है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बजट के माध्यम से न केवल आर्थिक आंकड़े पेश किए, बल्कि लगातार नौवीं बार बजट पेश कर एक विशिष्ट व्यक्तिगत रिकॉर्ड भी बनाया है. सरकार के समर्थक इस बजट को 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' को रफ्तार देने वाला मान रहे हैं. आज देश का युवा, किसान और निवेशक इस दस्तावेज में अपने भविष्य की तलाश कर रहे हैं. डिजिटल इंडिया के इस दौर में लैपटॉप और मोबाइल पर चल रही यह चर्चा दर्शाती है कि बजट अब केवल संसद तक सीमित नहीं रह गया है.
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