नई दिल्ली: BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीर ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस छेड़ दी. पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर रवि शास्त्री ने इस तस्वीर को साझा करते हुए मोदी की विदेश नीति की तारीफ की और इसे अभूतपूर्व बताया. इसके बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने उन्हें 2012 के BRICS सम्मेलन की तस्वीर दिखाकर याद दिलाया कि ऐसा नजारा पहले भी सामने आ चुका है.
रवि शास्त्री ने सोशल मीडिया पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग की तस्वीर साझा की. तस्वीर में तीनों नेता भारत मंडपम में लगाए गए पौधों को पानी देते नजर आ रहे हैं. शास्त्री ने लिखा कि उन्हें भारतीय होने पर इससे ज्यादा गर्व कभी महसूस नहीं हुआ. उन्होंने तीनों नेताओं की मौजूदगी को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का नया उदाहरण बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की.
शास्त्री की पोस्ट पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया. उन्होंने 2012 में दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन की तस्वीर साझा की, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ और रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव नजर आ रहे हैं. खेड़ा ने कहा कि शास्त्री के लिए यह जानना या याद रखना शायद ज्यादा उम्मीद करना है कि ऐसा संवाद पहले भी हो चुका है.
पवन खेड़ा ने अपनी टिप्पणी में यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा पोस्ट प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्देशित प्रचार का हिस्सा हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इसी आशय का तंज किया. कांग्रेस नेता ने शास्त्री की तारीफ को 2012 के घटनाक्रम के संदर्भ में चुनौती दी और कहा कि भारत की कूटनीतिक सक्रियता मौजूदा दौर से काफी पहले भी दिखाई देती रही है.
भारतीय युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने भी रवि शास्त्री की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने क्रिकेट से जुड़े शास्त्री के अनुभव को निशाना बनाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को IPL कमेंट्री की तरह नहीं देखा जा सकता. उनका तंज था कि हर परिचित दृश्य को पहली बार हुआ बताना सही नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है.
BRICS सम्मेलन के दौरान मोदी, पुतिन और जिनपिंग की साथ मौजूदगी चर्चा का प्रमुख विषय रही. भारत मंडपम में तीनों नेताओं द्वारा पौधे लगाने और उन्हें पानी देने की तस्वीर भी सामने आई. इसी तस्वीर को लेकर शास्त्री ने भारत की कूटनीति की तारीफ की, जबकि कांग्रेस नेताओं ने 2012 के सम्मेलन का उदाहरण देकर कहा कि रूस और चीन के शीर्ष नेताओं के साथ भारत की ऐसी कूटनीतिक तस्वीर नई नहीं है.