अगस्त के महीने में खाद्य पदार्थों की कीमतों में आए उछाल के कारण देश की खुदरा मुद्रास्फीति 8 महीने के उच्चतम स्तर 4.82% पर पहुंच गई. जुलाई में यह 4.45% थी. इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित मुद्रास्फीति लगातार तीसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. 2024 को आधार वर्ष बनाकर जारी की गई नई CPI श्रृंखला के तहत यह इस साल का सबसे उच्चतम स्तर है.
अक्टूबर 5 से 7 के बीच होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले यह अंतिम मुद्रास्फीति आंकड़ा है. अगस्त की बैठक में रेपो दर को 5.25% पर स्थिर रखा गया था. हालांकि, कोटक महिंद्रा बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज के अनुसार, मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए MPC द्वारा आगामी नीतिगत बैठकों में ब्याज दरों में 50-75 आधार अंकों की वृद्धि की संभावना काफी बढ़ गई है.
अगस्त में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) बढ़कर 5.95% पर पहुंच गया, जो जुलाई में 5.52% था. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य मुद्रास्फीति 6.13% और शहरी क्षेत्रों में 5.64% दर्ज की गई. वस्तुओं में प्याज की महंगाई दर बढ़कर 48.27%, लहसुन 43.60% और अदरक 73.82% पर रही. इसके विपरीत, टमाटर की कीमतों में 31.09% और आलू की कीमतों में 13.14% की गिरावट से आम जनता को कुछ राहत मिली.
महंगाई का असर सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं रहा. रेस्तरां और आवास सेवाओं में मुद्रास्फीति 8.38% और परिवहन क्षेत्र में 4.60% दर्ज की गई. वहीं व्यक्तिगत देखभाल और अन्य सेवाओं में यह 15.17% रही. कीमती धातुओं की बात करें तो चांदी के आभूषणों की मुद्रास्फीति 107.11% और सोने, हीरे व प्लैटिनम के आभूषणों की कीमतें बीते वर्ष की तुलना में 35.53% अधिक दर्ज की गईं.