भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, चीन समेत सभी देशों ने अपनाया ब्रिक्स दिल्ली घोषणापत्र
BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाया है. समूह ने एकतरफा टैरिफ और दबाव बनाने वाली कार्रवाइयों पर चिंता जताते हुए बहुपक्षीय सहयोग और नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था पर जोर दिया.
नई दिल्ली: दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS समिट में भारत को बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से पेश न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को सभी सदस्य देशों ने बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक को सार्थक और रचनात्मक बताते हुए कहा कि भारत की ओर से रखे गए सभी 10 प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई है. उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS बैठक के दौरान न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन को स्वीकार करने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य देश ने इस पर आपत्ति नहीं जताई. इसके बाद घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से अपनाया गया. मोदी ने कहा कि यह दस्तावेज BRICS देशों के बीच साझा प्रतिबद्धता और सहयोग की भावना को सामने रखता है.
PM मोदी ने बैठक को बताया सार्थक
घोषणा पत्र को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की बैठक सार्थक और रचनात्मक रही. उनके मुताबिक BRICS देशों ने साझा प्रतिबद्धता दिखाई है. मोदी ने यह भी कहा कि बदलती दुनिया को पुराने संसाधनों और व्यवस्थाओं के सहारे नहीं चलाया जा सकता. वैश्विक संस्थाओं में समय के साथ जरूरी बदलाव किए जाने की जरूरत है.
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ग्लोबल साउथ की भागीदारी पर जोर
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में ग्लोबल साउथ की भूमिका को भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि दुनिया के बदलते स्वरूप में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़नी चाहिए. उनके मुताबिक आज स्वीकार किया गया न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन BRICS देशों की साझा सोच और प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
घोषणा पत्र पर सहमति को अहम माना जा रहा
विशेषज्ञों के मुताबिक BRICS जैसे मंच पर साझा घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलना प्रधानमंत्री मोदी के लिए अहम उपलब्धि है. खास तौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता से जुड़ी मांगों को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
UNSC सुधार पर चीन को भी संदेश
घोषणा पत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और निर्णय प्रक्रिया में अधिक देशों की भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया गया है. ऐसे समय में जब चीन भी BRICS के प्रमुख सदस्यों में शामिल है, इस मुद्दे पर सहमति को भारत की कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है. मोदी ने साफ संकेत दिया कि वैश्विक संस्थाओं की मौजूदा संरचना में बदलाव अब जरूरी है.