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UNSC से AI तक, BRICS मंच से पीएम मोदी के 10 सुधारों का प्रस्ताव जिससे बदल जाएगी दुनिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक व्यवस्था बदलने के लिए 10 सुधारों का प्रस्ताव रखा.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
UNSC से AI तक, BRICS मंच से पीएम मोदी के 10 सुधारों का प्रस्ताव जिससे बदल जाएगी दुनिया
Courtesy: X

PM MODI BRICS : BRICS के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताई. उन्होंने BRICS Reform Roadmap बनाने का सुझाव दिया और 3R फॉर्मूला सामने रखा. इसमें समान भागीदारी, संकट में मिलकर तुरंत प्रतिक्रिया और वैश्विक नियम बनाने वाली संस्थाओं में बराबर भूमिका को अहम बताया गया.

प्रतिनिधित्व और वित्तीय संस्थानों में बराबर हिस्सेदारी

मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार अब और नहीं टलना चाहिए और इसके लिए तय समयसीमा जरूरी है. भारत लंबे समय से स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है. उन्होंने IMF और World Bank जैसी संस्थाओं में भी भारत, ब्राजील, रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की भूमिका बढ़ाने की बात कही. BRICS की बड़ी आबादी और आर्थिक ताकत को देखते हुए अधिक अधिकार मिलने से विकास के लिए फंडिंग तक पहुंच बेहतर हो सकती है और फैसलों में इन देशों की आवाज मजबूत होगी.

सामूहिक प्रतिक्रिया से समुद्री संकट का समाधान

पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक संस्थाओं पर भरोसा तभी बढ़ेगा, जब वे संकट के समय तेजी से काम करें. उन्होंने नौवहन के लिए आपात सुरक्षा, मेडिकल और सूचना व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया, जिसमें संबंधित देशों की नौसेनाएं जुड़ें. ऐसा सिस्टम होर्मुज जैसे संकट के दौरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और तेल की आपूर्ति बनाए रखने में मदद कर सकता है. इससे सप्लाई प्रभावित होने पर महंगाई का दबाव भी कम हो सकता है और समुद्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा बेहतर हो सकती है.

AI और नई तकनीकों के नियम बनाने में सबकी भूमिका

मोदी ने AI, साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने की बात कही. उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को सिर्फ नियम मानने वाला नहीं, नियम तय करने वाला पक्ष बनना चाहिए. UPI का उदाहरण देते हुए उन्होंने BRICS देशों के बीच सुरक्षित डिजिटल व्यवस्था और BRICS Continuity Mechanism का सुझाव दिया. इससे AI और डेटा से जुड़े नियम अधिक संतुलित बन सकते हैं, छोटे स्टार्टअप को बराबर अवसर मिल सकते हैं और बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.