मुंबई: महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के चुनाव गुरुवार को खत्म हुए. जिसके नतीजे आज जारी किए जाएंगे. BMC को इस चुनाव में सबसे प्रमुख बताया जा रहा है. ऐसे में ठाकरे ब्रदर्स के लिए यह चुनाव और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों ने 20 सालों के बाद इस चुनाव से पहले हाथ मिलाए हैं.
हालांकि नतीजे की घोषणा से पहले महायुति अपनी मजबूत पकड़ बनाई हुई है. विभिन्न नगर निगमों में 69 उम्मीदवारों को निर्विरोध रूप से चुन लिया गया है. चुने गए उम्मीदवारों में बीजेपी के 44, शिंदे गुट के शिवसेना को 22 और एनसीपी के 2 उम्मीदवारों को जीत मिली है.
2017 में हुए बीएमसी चुनाव में सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को हुआ था. बीजेपी के पार्षदों की संख्या 31 से बढ़कर 82 हो गई थी. वहीं, शिवसेना के पार्षदों की संख्या में भी थोड़ा इजाफा हुआ और उसके 84 पार्षद जीते थे. चुनाव के बाद बीजेपी और शिवसेना साथ आए, लेकिन मेयर पद शिवसेना को मिला था.
अब अगर देखा जाए तो बीएमसी चुनाव ठाकरे बंधुओं के लिए बेहद ही अहम हो चला है. राज ठाकरे को साल 2024 के विधानसभा चुनावों में कोई खास सफलता नहीं मिली थी. वहीं, उद्धव ठाकरे की पार्टी का प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा. ऐसे में बीएमसी शिवसेना के लिए इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पार्टी की ताकत भी बनी रहेगी और मुंबई पार्टी की राजनीति के लिए एक अहम केंद्र भी है.
2019 की बात करें तो उद्धव ठाकरे बीजेपी से अलग हो गए और कांग्रेस-एनसीपी के साथ आ गए. हालांकि, इसका उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ. वहीं, राज ठाकरे की पार्टी का असर भी कुछ खास नहीं रहा और लगातार घटता रहा. ऐसे में यह चुनाव दोनों ठाकरे बंधुओं के लिए अस्तित्व की लड़ाई बन गया है. अगर वो हारते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी पकड़ कमजोर हो सकती है.
महाराष्ट्र में इस बार BMC को छोड़कर अन्य 28 निगमों में बहु-सदस्यीय वार्ड प्रणाली लागू की गई. जिसमें हर वार्ड में 3-5 कॉर्पोरेटर चुने जाते हैं. 29 नगर निगमों में गुरुवार को मतदान सुबह 7:30 से शाम 5:30 बजे तक हुआ. BMC में महायुति और ठाकरे बंधुओं के बीच कड़ा मुकाबला हुआ. 20 साल बाद एकजुट हुए ठाकरे परिवार ने चुनाव प्रचार के दौरान मराठी अस्मिता और स्थानीय मुद्दों पर जोर दिया.