BJP retort to Rahul Gandhi attack: स्टूडेंट्स की साल भर मेहनत और तैयारी के बाद जब एग्जाम का दिन आता है तो सभी को उम्मीद होती है कि वो अपना 100 प्रतिशत देंगे तो पास जरूर हो जाएंगे, हालांकि अपना 100 प्रतिशत देने के बाद भी जब नतीजे किसी घोटाले या पेपर लीक की वजह से बदल जाते हैं तो वो हताश हो जाते हैं. ये हम नहीं बल्कि देश भर में चल रहे नीट-यूजी परीक्षा और यूजीसी-नेट के विवाद को देखते हुए विपक्ष ने कहा है.
देश भर में एग्जाम्स में हो रही धांधली को देखते हुए लगातार सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं और अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. इस बीच गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी पर निशाना साधा और कहा कि पहले पीएम मोदी की छाती 56 इंच की हो सकती थी लेकिन आजकल 30-32 ही रह गई है. इस दौरान माकपा नेता सीताराम येचुरी ने नीट और यूजीसी-नेट मुद्दों की न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की है.
नीट मुद्दे और यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने पर माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, 'हम न्यायालय की निगरानी में जांच चाहते हैं. व्यापमं मामला भी सीबीआई को दिया गया था, उसका क्या हुआ? सीबीआई की खासियत विपक्षी नेताओं के पीछे पड़ना है.'
वहीं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने नीट और यूजीसी-नेट पर छात्रों की चिंताओं को नजरअंदाज करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की.
भूपेश बघेल ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी 'मन की बात' कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने युवाओं की मन की बात नहीं सुनी. उन्हें इसे (यूजीसी-नेट जून परीक्षा का जिक्र करते हुए) पहले ही रद्द कर देना चाहिए था और छात्रों से माफी मांगनी चाहिए थी क्योंकि वे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.'
शशि थरूर ने कहा, 'यह चौंकाने वाला है. यह वास्तव में सिस्टम के काम करने के तरीके में कुछ बुनियादी रूप से सड़ा हुआ दिखाता है...यह एक भयानक स्थिति है और सरकार को इस पर काम करना होगा क्योंकि अब जब उन्होंने एक राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी बनाने और इस तरह की राष्ट्रीय परीक्षाएं प्रदान करने और इन परीक्षाओं को अनिवार्य बनाने की जिम्मेदारी ली है, तो उन्हें अधिक निष्पक्ष तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए और पेपर लीक की इस हास्यास्पद प्रथा को बहुत कड़ी सजा मिलनी चाहिए.'
जहां कांग्रेस और विपक्ष के नेता मोदी सरकार पर हमला कर लगातार उसे घेरने की कोशिश कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी नेताओं ने भी मोर्चा संभाल कर पलटवार किया है. नीट और यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने के मुद्दे पर राहुल गांधी के बयान पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि जो आदमी खुद 3 बार फेल हो गया हो वो स्टूडेंट्स का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकता है.
उन्होंने कहा,' राहुल गांधी तीसरी बार फेल हो गए हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे गुजरात और मध्य प्रदेश के युवाओं को गाली दे सकते हैं...उन्होंने (राहुल गांधी) कहा कि गुजरात और मध्य प्रदेश (पेपर लीक का) केंद्र हैं. अगर आपको किसी परीक्षा से कोई समस्या है, तो आप उसकी कमियों को बता सकते हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए कि आपको पीएम मोदी से कुछ व्यक्तिगत परेशानी है, आप मध्य प्रदेश और गुजरात के युवाओं पर इतना बड़ा आरोप लगाते हैं...अगर देश में पेपर लीक का कोई केंद्र है, तो वह कांग्रेस और राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार है.'
जहां शहजाद पूनावाला ने विपक्ष पर हमला बोला तो वहीं पर भाजपा के सुधांशु त्रिवेदी ने नीट विवाद के बीच सरकार का बचाव करते हुए राहुल गांधी की जमकर आलोचना की.
उन्होंने कहा, 'नीट परीक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क और संवेदनशील है. सरकार दृढ़ संकल्पित है और लाखों छात्रों के साथ कोई अन्याय नहीं होने देगी...इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी...राहुल गांधी को लाखों छात्रों के भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है, वह सिर्फ इस विषय पर अपनी राजनीति करना चाहते हैं. राजस्थान में पेपर लीक हुआ, लेकिन राहुल गांधी ने इस पर एक शब्द भी नहीं कहा.'
तेजस्वी का हाथ बता रहे हैं विजय कुमार सिन्हा
वहीं बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा तो नीट विवाद पर लगातार इंडिया गठबंधन के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का नाम ले रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले हाथ आरजेडी नेता से जुड़े हैं.
उन्होंने कहा'यह बहुत गंभीर मामला है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए. यह मामला तेजस्वी यादव से जुड़ा है...अपने पद का दुरुपयोग करके ऐसा खेल खेल रहे हैं और प्रतिभाशाली लोगों का गला घोंट रहे हैं, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है...एक बार जांच हो जाए तो सब कुछ साफ हो जाएगा.'
गौरतलब है कि एनटीए ने विभिन्न उच्च न्यायालयों से लंबित याचिकाओं को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए अलग-अलग याचिकाएं भी दायर की हैं. याचिकाओं में से एक याचिका 20 छात्रों की है, जो NEET-UG 2024 परीक्षा में शामिल हुए थे, जिसमें कथित विसंगतियों के कारण परीक्षा को नए सिरे से आयोजित करने की मांग की गई है. शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में '0.001 प्रतिशत' तक की मामूली लापरवाही को भी पूरी तरह से संबोधित किया जाना चाहिए.
NEET-UG परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार NTA इन आरोपों को लेकर जांच का सामना कर रहा है. इस बीच, बुधवार रात को शिक्षा मंत्रालय ने इसकी अखंडता पर चिंताओं के कारण UGC-NET जून 2024 परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की. इस घोषणा से छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई. मंत्रालय ने बाद में एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर स्पष्ट किया कि केवल UGC-NET परीक्षा रद्द की गई है, NEET-UG नहीं.
अगले दिन, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि UGC-NET परीक्षा के बारे में औपचारिक रूप से कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. हालांकि, संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल ने बताया कि एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर यह निर्णय खुद लिया गया था, जिससे पता चलता है कि परीक्षा की अखंडता से समझौता किया गया था. मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है और फिलहाल इसकी जांच चल रही है.
जायसवाल ने कहा कि, 'कोई शिकायत नहीं मिली है, लेकिन हमें जो इनपुट मिले हैं, उनसे पता चलता है कि परीक्षा की शुचिता से समझौता किया गया है. छात्रों के हितों की रक्षा के लिए यह कार्रवाई स्वतः संज्ञान लेकर की गई है.'