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महाराष्ट्र में बीजेपी-कांग्रेस ने गठबंधन कर शिंदे गुट को दिया बड़ा झटका, अंबरनाथ नगर पालिका से शिवसेना हुई आउट

अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी के साथ गठबंधन कर बहुमत हासिल किया है. इस गठबंधन से शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
महाराष्ट्र में बीजेपी-कांग्रेस ने गठबंधन कर शिंदे गुट को दिया बड़ा झटका, अंबरनाथ नगर पालिका से शिवसेना हुई आउट
Courtesy: @ilyasilukhan x account

नई दिल्ली: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है. ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर गठबंधन कर लिया है, जिससे एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई है. इस घटनाक्रम को स्थानीय राजनीति में बड़ा उलटफेर माना जा रहा है, क्योंकि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे के विरोधी दल यहां साथ आ गए हैं.

अंबरनाथ नगर पालिका के हाल ही में हुए चुनावों में 60 सदस्यीय परिषद के लिए मतदान हुआ था. शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसे 27 सीटें मिली थीं. भाजपा को 14 सीटें, कांग्रेस को 12 सीटें, अजित पवार गुट की एनसीपी को चार सीटें मिली थीं, जबकि दो निर्दलीय पार्षद भी चुने गए थे. संख्या बल के लिहाज से शिवसेना आगे थी, लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा.

बीजेपी-कांग्रेस ने क्यों किया गठबंधन?

नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की उम्मीदवार मनीषा वालेकर को हरा दिया. हालांकि अध्यक्ष पद मिलने के बावजूद भाजपा के पास अपने दम पर नगर पालिका चलाने के लिए बहुमत नहीं था. इसी कमी को पूरा करने के लिए भाजपा ने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी से बातचीत शुरू की.

शिवसेना कैसे हुई नगर पालिका की सत्ता से बाहर?

मंगलवार को इन चर्चाओं के बाद अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया गया. इस गठबंधन में 14 भाजपा पार्षद, 12 कांग्रेस पार्षद, चार एनसीपी अजित पवार गुट के पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं. इस तरह गठबंधन की कुल संख्या 32 हो गई, जो बहुमत के आंकड़े को पार करती है. इस गठबंधन के बनने के साथ ही शिवसेना को नगर पालिका की सत्ता से बाहर होना पड़ा.

क्या था गठबंधन का उद्देश्य?

भाजपा पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल को इस गठबंधन का समूह नेता बनाया गया है. उन्होंने कहा कि शिवसेना के लंबे शासनकाल में नगर पालिका में भ्रष्टाचार और डर का माहौल बन गया था. उन्होंने दावा किया कि गठबंधन का उद्देश्य अंबरनाथ में पारदर्शी प्रशासन और विकास को आगे बढ़ाना है.

वहीं शिवसेना ने इस गठबंधन की कड़ी आलोचना की है. पार्टी नेताओं ने इसे अनैतिक और अवसरवादी कदम बताया है. अंबरनाथ से शिवसेना विधायक बालाजी किनिकर ने कहा कि भाजपा एक तरफ कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है और दूसरी तरफ सत्ता के लिए गठबंधन कर रही है.