Bilkis Bano gangrape case All 11 convicts surrendered: बिलकिस बानो मामले के सभी 11 दोषियों ने रविवार शाम को गुजरात के पंचमहल जिले के गोधरा उप जेल में आत्मसमर्पण कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने सभी 11 दोषियों को सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसकी समय सीमा रविवार देर रात खत्म हो गई. समय सीमा के खत्म होने से पहले ही दोषियों ने सरेंडर कर दिया.
जानकारी के मुताबिक, बिलकिस बानो से गैंगरेप के सभी 11 दोषी देर रात 11:30 बजे दो निजी वाहनों से सिंगवाड रणधीकपुर से गोधरा उप जेल पहुंचे. स्थानीय क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर एनएल देसाई ने बताया कि सभी 11 दोषियों ने रविवार देर रात जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है. बता दें कि 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गोधरा दंगों के दौरान बलात्कार के मामले में दोषियों को गुजरात सरकार की ओर से दी गई रिहाई को रद्द कर दिया था. कोर्ट ने इस दौरान कहा था कि गुजरात सरकार ऐसा आदेश पारित करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं थी.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीवी नागरथाना और उज्जल भुइयां की पीठ ने दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल वापस जाने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश के बाद दोषियों ने अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए जेल अधिकारियों से सरेंडर के लिए अतिरिक्त समय मांगा था. दोषियों की अपील के बाद छूट देने से इनकार कर दिया गया और उन्हें कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दो सप्ताह यानी 21 जनवरी तक जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया.
11 दोषियों में बाकाभाई वोहानिया, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, गोविंद नाई, जसवन्त नाई, मितेश भट्ट, प्रदीप मोरधिया, राधेश्याम शाह, राजूभाई सोनी, रमेश चंदना और शैलेश भट्ट शामिल है. बता दें कि वारदात के दौरान बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं. इस दौरान बिलकिस बानो के साथ उनकी तीन साल की बेटी भी थी.
बिलकिस ने फैसले के बाद कहा था कि मेरी आंखों में आंसू हैं, ये आंसू खुशी के हैं. उन्होंने कहा कि ये डेढ़ साल में पहली बार है, जब मेरे चेहरे पर मुस्कान आई है. कोर्ट के इस फैसले के बाद मेरा न्याय पर भरोसा बढ़ गया. बिलकिस बानो ने फैसले के बाद अपनी वकील, दोस्त, पति और हर उस शख्स का शुक्रिया अदा किया, जिसने मुश्किल घड़ी में उनका साथ दिया.
बिलकिस बानो ने कहा कि जब 15 अगस्त 2022 गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के बाद दोषियों को रिहा किया गया तो मैं हैरान रह गई थी. मैं डर गई थी और अंदर से टूट गई थी. लेकिन इस मुश्किल वक्त में कई ऐसे लोग थे, जिन्होंने मेरा हौंसला बढ़ाया, जिसके बाद मैंने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में PIL (जनहित याचिका) दायर की.