नई दिल्ली: सपनों की नगरी मुंबई में एक ऐसी इमारत की नींव रखने की तैयारी हो रही है, जिसने महाराष्ट्र और बिहार की सियासत में ज्वालामुखी दहका दिया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली बिहार सरकार ने मुंबई के पॉश इलाके एलफिंस्टन एस्टेट में 314.20 करोड़ रुपये की लागत से बिहार भवन बनाने का निर्णय लिया है. राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है. बता दें कि कि बिहार बनाम मुंबई की राजनीति कई दश्कों से चली आ रही है.
मनसे नेता यशवंत किलेदार ने इस निर्माण को रोकने की सीधी धमकी दी है. मनसे का तर्क है कि जब महाराष्ट्र खुद बेरोजगारी और किसानों की बदहाली से जूझ रहा है, तो मुंबई की बेशकीमती जमीन पर बाहरी राज्यों के भवन का बोझ क्यों डाला जाए. किलेदार ने एक तीखा सवाल भी दागा अगर नीतीश सरकार को कैंसर मरीजों की इतनी ही फिक्र है, तो वे बिहार में ही टाटा मेमोरियल जैसा अस्पताल क्यों नहीं बनाते. मरीजों को मुंबई आने के लिए मजबूर ही क्यों होना पड़ता है.
बिहार सरकार इस भवन को केवल एक प्रशासनिक इमारत नहीं, बल्कि मुंबई में इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों के लिए एक आसरा बता रही है. बिहार से हर साल हजारों कैंसर मरीज टाटा मेमोरियल अस्पताल आते हैं, जिन्हें मुंबई की महंगी होटलों में रुकना असंभव होता है. 0.68 एकड़ में फैली यह 30 मंजिला इमारत आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी. सुविधाविवरणमरीज डोरमेट्रीपरिजनों के लिए 240 बिस्तरों की व्यवस्थाकुल कमरे 178 स्मार्ट पार्किंग 233 वाहनों के लिए सेंसर आधारित मल्टी लेवल पार्किंग, अतिरिक्त कॉन्फ्रेंस हॉल होंगे.
मनसे की धमकी पर बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने पलटवार करते हुए इसे लोकतंत्र बनाम राजतंत्र की लड़ाई करार दिया है. उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि मुंबई किसी की जागीर नहीं है. यह देश का हिस्सा है और किसी में दम है तो सरकारी काम को रोक कर दिखाए. अब देखना यह होगा कि क्या यह 30 मंजिला इमारत मुंबई के आसमान को छू पाएगी या राजनीतिक विरोध की भेंट चढ़ जाएगी.