Bengaluru Water Crisis: बेंगलुरु के लोगों को शहर में पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है. कई मल्टीस्टोरी अपार्टमेंट्स में पानी के यूज को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं, जिससे लोगों को बर्तन और कपड़े धोने की तो छोड़िए वॉशरूम तक में पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है. बेंगलुरु के हरलूर इलाके में रहने वाले एक शख्स ने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट 'एक्स' पर अपनी आपबीती शेयर की है.
एक्स पर शेयर की गई आपबीती में शख्स ने कहा कि उसकी प्लानिंग शहर में फ्लैट खरीदने की थी, लेकिन अब उसने पानी की संकट को देखते हुए अपनी प्लानिंग चेंज कर दी है. पूर्वी बेंगलुरु सिटीजन मूवमेंट नाम के एक्स हैंडल ने पानी की संकट का सामना करने और फिर फ्लैट खरीदने की प्लानिंग को चेंज करने वाले शख्स की कहानी को शेयर किया है.
शख्स ने अपने पोस्ट में लिखा कि मैं अपनी जिंदगी में कभी ऐसी स्थिति में नहीं रहा. वॉशरूम तक में पानी नहीं है. मैंने 2 BHK के लिए 40 हजार रुपये से ज्यादा का किराया दे रहा हूं, लेकिन मुझे पानी तक नसीब नहीं हो रहा है. सुबह जब 30 मिनट के लिए पानी आया, तो मैं पानी स्टोर नहीं कर पाया, क्योंकि मैं सो रहा था. मैं नाइट शिफ्ट में काम करने के कारण जल्दी नहीं उठ पाता.
शख्स ने आगे कहा कि पहले मेरी प्रॉपर्टी खरीदने की योजना थी, लेकिन अब ऐसी स्थिति से गुजरने के बाद मैंने प्लानिंग चेंज कर दी है. बिना पानी वाली इस जगह पर रहने से बेहतर है कि मैं अपने गांव में रहूं. बाद में हैंडल ने अपडेट किया कि संकट से जूझ रहे शख्स ने अब दिल्ली-एनसीआर में शिफ्ट होने का फैसला किया है और अगले दो महीनों में वो शिफ्ट हो जाएगा.
Being local & brought up in #Bengaluru, have never ever faced this level of #WaterCrisis
— ಪ್ರಸನ್ನ (Prasanna) 🇮🇳 (@MurthyMaga) March 13, 2024
City has lost numerous #Lakes #Rajakaaluve encroached & illegal occupation by #LandMafia #RealEstate #Mafia #Waqf #Politicians creating the notorious #BengaluruWaterCrisis for common citizens https://t.co/CYs9DOsbH0
इस साल पूरा कर्नाटक बारिश की कमी के कारण गंभीर सूखे का सामना कर रहा है. बेंगलुरु पानी की समस्या से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. शहर के अधिकांश बोरवेल सूख रहे हैं और कई घर पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं.
इस बीच, कई कंपनियों के कर्मचारियों ने वर्क फ्रॉम होम के ऑप्शन को अनिवार्य करने की मांग की गई है. कई लोगों का कहना है कि वे संकट से जूझने के बजाए घर (गांव) लौटना चाहते हैं और घर से काम करना चाहते हैं.