दिसपुर: निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को असम की सभी 126 विधानसभा सीटों के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी. इस सूची में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या 2,49,58,139 दर्ज की गई है.
मसौदा सूची की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 2,43,485 की कमी आई है. अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव व्यापक सत्यापन प्रक्रिया और दावों के निपटारे के बाद सामने आया है.
असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, अंतिम सूची में कुल 2,49,58,139 मतदाता शामिल हैं. यह संख्या प्रारंभिक मसौदा सूची से कम है. आयोग का कहना है कि सूची पूरी तरह जांच और सुधार के बाद तैयार की गई है.
अंतिम मतदाता सूची में 1,24,82,213 पुरुष मतदाता और 1,24,75,583 महिला मतदाता दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा तीसरे लिंग श्रेणी में 343 मतदाता शामिल हैं. आंकड़े लगभग संतुलित मतदाता भागीदारी को दर्शाते हैं.
विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले 22 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 तक राज्यभर में घर-घर जाकर सत्यापन अभियान चलाया गया. इस दौरान मतदाता विवरण की जांच की गई और आवश्यक सुधार दर्ज किए गए.
समेकित मसौदा मतदाता सूची 27 दिसंबर 2025 को प्रकाशित की गई थी. इसके बाद 27 दिसंबर से 22 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया गया. निर्वाचन आयोग ने बताया कि सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद ही अंतिम मतदाता सूची तैयार की गई. आयोग के अनुसार, यह सूची आगामी चुनावी प्रक्रिया के लिए आधार बनेगी.
आपको बता दें कि विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के तहत असम की सभी 126 विधानसभा सीटों से जुड़ा मतदाता डेटा के अपडेट किया गया है. बड़ी संख्या में नाम हटने और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के जुड़ने से कई इलाकों में चुनावी गणित बदलने की संभावना है. इसी को लेकर राजनीतिक दल अब यह आकलन करने में जुटे हैं कि किन सीटों पर सबसे ज्यादा बदलाव हुआ है और इसका असर चुनावी नतीजों पर कैसे पड़ेगा.
असम विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मई 2026 में पूरा हो रहा है. ऐसे में राज्य में मार्च या अप्रैल 2026 में चुनाव कराए जाने की संभावना जताई जा रही है. विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं. वर्ष 2021 के चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 75 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी और हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री बने थे.
वर्ष 2026 का चुनाव इस बार कई मायनों में अलग होगा. यह नया परिसीमन लागू होने के बाद होने वाला पहला विधानसभा चुनाव होगा. निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पुराने वोट बैंक और समीकरण प्रभावित हुए हैं. इसी कारण सभी दलों के लिए यह चुनाव पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.