Supreme Court India: हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर और राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए अंतरिम जमानत दी है.
सीजेएम सोनीपत के समक्ष जमानत बॉन्ड की शर्त
बता दें कि कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि महमूदाबाद को अंतरिम जमानत पाने के लिए सीजेएम, सोनीपत की संतुष्टि के आधार पर जमानत बॉन्ड दाखिल करना होगा. जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की गई है.
पोस्ट से संबंधित लेखन और भाषण पर रोक
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अली खान महमूदाबाद ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी दोनों पोस्टों के संबंध में कोई नया ऑनलाइन लेख या भाषण नहीं देंगे. कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह मामला जांच के दायरे में है, इसलिए ऐसी किसी भी गतिविधि पर रोक आवश्यक है जिससे जांच प्रभावित हो सकती है.
Supreme Court orders release of Ali Khan Mahmudabad, associate professor and head of the Political Science department at Ashoka University in Haryana, against his arrest over a social media post on Operation Sindoor. SC grants interim bail to Mahmudabad subject to furnishing of… pic.twitter.com/Ua9Kc6YyqU
— ANI (@ANI) May 21, 2025
क्या है मामला?
बताते चले कि 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर अली खान महमूदाबाद द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को लेकर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था. उन पर देश विरोधी भावना भड़काने और संवेदनशील मुद्दे पर गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करने के आरोप लगे थे. इसके बाद गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.
हालांकि, इस मामले ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारियों के संतुलन पर बहस छेड़ दी है. कोर्ट के इस फैसले को विशेषज्ञ कानून के दायरे में सोच-समझकर लिया गया संतुलित कदम मान रहे हैं.