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उत्तर भारत का फेफड़ा कही जाने वाली अरावली की पहाड़ियों में लगी भीषण आग, आस-पास के घरों तक पहुंची लपटें

अरावली की पहाड़ियों में लगी भीषण आग ने टीकली गांव में भारी दहशत पैदा कर दी. दमकल कर्मियों की हड़ताल और कठिन पहाड़ी रास्तों की चुनौतियों के बावजूद ग्रामीणों के सहयोग से आग पर बमुश्किल काबू पाया जा सका.

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Kanhaiya Kumar Jha

गुरुग्राम: अरावली पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों में सोमवार को लगी भीषण आग ने एक बार फिर पर्यावरण और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. टीकली गांव के पास पहाड़ी के ऊपरी हिस्से से शुरू हुई यह आग तेज हवाओं और सूखी घास के कारण देखते ही देखते नीचे की ओर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गई. दमकल विभाग की जारी हड़ताल के बीच यह आपदा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है जिससे हरित क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है.

पहाड़ी के शिखर से उठी आग की लपटों ने सोमवार को टीकली गांव के आसपास अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया. पहाड़ियों पर मौजूद सूखी झाड़ियों और घास ने आग के लिए ईंधन का काम किया जिससे इसकी तीव्रता बढ़ती गई. तेज हवाओं के कारण यह आग बड़ी तेजी से नीचे की ओर आबादी वाले घरों की तरफ बढ़ने लगी. इससे न केवल रिहायशी मकानों को खतरा पैदा हुआ बल्कि बड़ी संख्या में कीमती पेड़-पौधे भी जलकर पूरी तरह राख हो गए.

दमकल विभाग और ग्रामीणों का संघर्ष 

सूचना मिलते ही सेक्टर-29 दमकल केंद्र से राहत दल मौके पर पहुंचा. हालांकि खड़ी पहाड़ी होने के कारण दमकल की गाड़ियों को आग के मुख्य केंद्र तक पहुंचाना लगभग नामुमकिन था. ऐसे में दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर पैदल ही दुर्गम पहाड़ी पर चढ़ाई शुरू की. ग्रामीणों ने भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पानी और अन्य उपलब्ध संसाधनों के साथ उनका भरपूर सहयोग किया. इस सामूहिक संघर्ष के बाद ही आग की लपटों को नियंत्रित किया जा सका.

हड़ताल ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें 

इस आपदा के समय सबसे चिंताजनक बात यह रही कि दमकल विभाग के कर्मचारी पिछले करीब ढाई हफ्तों से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं. मैनपावर और आधुनिक उपकरणों की कमी ने बचाव कार्य की गति को काफी धीमा कर दिया. अधिकारियों के अनुसार भीषण गर्मी के इस मौसम में रोजाना पांच से छह स्थानों पर आग लगने की घटनाएं रिपोर्ट हो रही हैं. ऐसे में कर्मचारियों की कमी से राहत कार्यों में जोखिम और चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं.

प्रकृति और वन्य जीवों पर मंडराता खतरा 

अरावली के जंगलों में लगने वाली यह आग केवल वनस्पति तक सीमित नहीं है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल गर्मियों में होने वाली ऐसी घटनाओं से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. आग की चपेट में आने से अरावली के हरित क्षेत्र में रहने वाले कई वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं. यदि यह सिलसिला यूँ ही जारी रहा तो वन्य जीवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और पारिस्थितिक संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा.

सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग 

घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यप्रणाली के प्रति गहरा रोष देखा गया. उन्होंने मांग की है कि अरावली क्षेत्र में आग की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को ठोस और स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करना चाहिए. साथ ही दमकल विभाग की हड़ताल का तुरंत समाधान निकालकर विभाग के संसाधनों को मजबूत करने की आवश्यकता है. निवासियों का मानना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में ऐसी घटनाएं और भी घातक हो सकती हैं.