विशाखापत्तनम: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के कसीबुग्गा शहर में बने वेंकटेश्वर मंदिर में शुक्रवार को हुई भगदड़ में लोगों की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया है. मंदिर का निर्माण कराने वाले ओडिशा के 94 वर्षीय हरि मुकुंद पांडा ने शनिवार को कहा कि भगदड़ के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है, जिसमें एक बच्चे समेत नौ लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए.
आंध्र प्रदेश पुलिस ने मीडिया को बताया कि पांडा और मंदिर प्रबंधन के सदस्यों पर कार्यक्रम के संचालन में कथित लापरवाही के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. आंध्र प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने बताया कि आयोजकों ने सभा के लिए आधिकारिक अनुमति नहीं ली थी और वे इतनी बड़ी संख्या में लोगों के आने का अनुमान नहीं लगा पाए थे.
राज्य के एक मंत्री ने बताया कि मंदिर में आमतौर पर 3,000 से 5,000 श्रद्धालुओं के आने की व्यवस्था होती है, लेकिन कार्तिक एकादशी के पावन अवसर पर 25,000 से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए थे. सरकारी सूत्रों ने यह भी बताया कि मंदिर निजी तौर पर बनाया गया था और धर्मस्व विभाग के नियंत्रण में नहीं था. जिस जगह श्रद्धालु इकट्ठा हुए थे, वहां अभी भी निर्माण कार्य चल रहा था, और प्रवेश और निकास द्वार एक ही होने के कारण, भीड़ और भी ज्यादा बढ़ गई थी.
हालांकि, पांडा ने इस त्रासदी को 'दैवीय कृत्य' बताया. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'कोई भी जिम्मेदार नहीं है, यह ईश्वरीय कृत्य था.' श्रीकाकुलम के पुलिस अधीक्षक केवी महेश्वर रेड्डी ने कहा कि अफरा-तफरी तब शुरू हुई जब मंदिर में एकादशी उत्सव के दौरान छह फुट ऊंची लोहे की रेलिंग गिर गई, जिससे श्रद्धालुओं में अचानक भीड़ उमड़ पड़ी. रेड्डी ने बताया, 'यह भगदड़ नहीं, बल्कि एक दुर्घटना थी. छह फुट ऊंची रेलिंग टूट गई, और इसी वजह से यह दुखद स्थिति पैदा हुई.'
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि मंदिर प्रशासन ने पुलिस को इस घटना की सूचना नहीं दी. उन्होंने कहा, 'अगर उन्होंने हमें सूचित किया होता, तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती थी.' उन्होंने आगे कहा, 'अत्यधिक भीड़भाड़ के कारण पांच अन्य घायल हो गए और नौ लोगों की मौत हो गई '. नायडू ने कहा कि इस घटना को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा और जिम्मेदार लोगों को तुरंत हिरासत में लिया जाएगा.