महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी सुर्खियों में है. मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने दक्षिण मुंबई में ‘सत्याचा मोर्चा’ निकाला. इस रैली में एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. यह पहली बार है जब इतने लंबे अंतराल के बाद दोनों ठाकरे भाई किसी बड़े राजनीतिक मुद्दे पर एकजुट होकर सामने आए हैं.
रैली में शामिल होने के लिए राज ठाकरे ने दादर से चर्चगेट तक लोकल ट्रेन का सफर तय किया. उन्होंने अपने साथ मतदाता सूची में गड़बड़ियों से जुड़े कई प्रमाण प्रस्तुत किए. राज ने आरोप लगाया कि कल्याण-डोंबीवली के 4,500 से अधिक मतदाताओं ने मलाबार हिल्स क्षेत्र में भी वोट डाला है. उन्होंने कहा, “जब सभी दल मानते हैं कि सूचियों में दोहराव है, तो उसे ठीक करने में दिक्कत क्या है?”
VIDEO | Mumbai: MNS chief Raj Thackeray and Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackey address a gathering as they join the protest against alleged vote theft in Maharashtra elections.
(Full video available on PTI Videos- https://t.co/dv5TRAShcC) pic.twitter.com/0QpPNKn16x — Press Trust of India (@PTI_News) November 1, 2025
यह रैली केवल मतदाता सूची की गड़बड़ी का विरोध नहीं, बल्कि विपक्ष की एकता का प्रदर्शन भी बनी. राज, उद्धव, शरद पवार और कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिला कि राज ठाकरे निकट भविष्य में महाविकास आघाड़ी (एमवीए) का हिस्सा बन सकते हैं. इससे पहले उनके गठबंधन में शामिल होने को लेकर कांग्रेस में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी.
मोर्चे में संबोधन के दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा, “राज ठाकरे ने जो प्रमाण जुटाए हैं, उन्हें हम न्यायालय में पेश करेंगे. अगर वहां से न्याय नहीं मिला, तो जनता की अदालत में जाएंगे.” उन्होंने सत्तारूढ़ दलों पर निशाना साधते हुए कहा, “पहले पार्टी चुराई, फिर निशान चुराया, अब क्या वोट भी चुराओगे?”
महाविकास आघाड़ी की रैली के जवाब में भाजपा ने दक्षिण मुंबई के गिरगांव इलाके में ‘मूक प्रदर्शन’ किया. नेताओं ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने कहा कि विपक्ष निकाय चुनावों से पहले जनता को गुमराह करने के लिए फर्जी बयानबाजी कर रहा है.
राज ठाकरे की सक्रियता से महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. विपक्षी दलों का यह साझा मंच आगामी निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ दलों के लिए चुनौती बन सकता है. ‘सत्याचा मोर्चा’ के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राज ठाकरे आधिकारिक तौर पर एमवीए का हिस्सा बनेंगे.