नई दिल्ली: देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पूरी तरह चाक-चौबंद करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत और बांग्लादेश की सीमा के नजदीक स्थित त्रिपुरा के सालबगान इलाके का दौरा किया. वहां उन्होंने सीमा सुरक्षा की वर्तमान स्थिति का जायजा लेने के लिए एक मैराथन समीक्षा बैठक की. इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए रणनीति बनाना था.
गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करना केवल सीमा सुरक्षा बल (BSF) की जिम्मेदारी नहीं है. अब से पूरे स्थानीय प्रशासन को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी. इस नई योजना के तहत जिला मजिस्ट्रेट (DM), पुलिस अधीक्षक (SP), पटवारी और ग्रामीण स्तर पर सरपंच मिलकर एक अभेद्य सुरक्षा ढांचा तैयार करेंगे. इस एकीकृत व्यवस्था को "फुल-प्रूफ बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड" का नाम दिया गया है जो हर स्तर पर निगरानी रखेगा.
बैठक में सीमा सुरक्षा के लिए एक बिल्कुल नए और अनूठे मॉडल 'टोटल टेरिटोरियल डिफेंस' को लागू करने पर सहमति बनी. गृह मंत्री ने कहा कि केवल कटीले तारों की फेंसिंग लगाने से सीमाएं सुरक्षित नहीं हो सकतीं. अब सीमावर्ती गांवों के नागरिकों को भी सुरक्षा तंत्र का हिस्सा बनाया जाएगा. इसके लिए स्थानीय निवासियों के लिए विशेष ट्रेनिंग कैंप आयोजित किए जाएंगे, जहां उन्हें हथियारों की अवैध तस्करी और मादक पदार्थों के व्यापार से निपटने के गुर सिखाए जाएंगे.
तकनीकी मोर्चे पर बड़ा बदलाव करते हुए गृह मंत्रालय अपने सबसे आधुनिक सीसीटीवी मॉडल को देश में पहली बार त्रिपुरा सीमा पर लॉन्च करने जा रहा है. इसके तहत सीमा पर लगे बीएसएफ के तमाम पुराने कैमरों को हाई-टेक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा. इन कैमरों का सीधा संपर्क जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम से होगा. इस तकनीक के लाइव फीड की मदद से सीमा पर होने वाली किसी भी संदिग्ध हलचल की जानकारी स्थानीय पुलिस को तुरंत मिल जाएगी.
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सबसे बड़ा फैसला सीमावर्ती इलाकों में संपत्तियों की खरीद-बिक्री को लेकर लिया गया है. गृह मंत्री ने आदेश दिया है कि बॉर्डर के पास जमीन के लेन-देन, भारी-भरकम पैसों के ट्रांसफर और बड़े निर्माण कार्यों की बारीकी से स्क्रूटनी की जाए. इसके लिए पिछले पांच वर्षों के सभी भूमि दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी. इसके साथ ही नकली नोटों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए राज्य और केंद्र की एजेंसियां साझा अभियान चलाएंगी.