अचानक कश्मीर क्यों पहुंचे अमित शाह, क्या फिर कुछ होने वाला है? जानिए क्या हैं चर्चाएं
Amit Shah Kashmir Visit: बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अचानक कश्मीर पहुंचने से हर ओर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
देशभर में जोर-शोर से चुनाव लड़ रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस बार कश्मीर से नदारद है. इसको लेकर खुद बीजेपी के स्थानीय नेता ही पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं. ऐसे में चुनाव के बीच अचानक अमित शाह के कश्मीर पहुंचने हर तरफ चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कोई इसे लोकसभा चुनाव से जोड़ रहा है तो कोई कह रहा है कि जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से कुछ बड़ा होने वाला है. इस बार के लोकसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर में से जम्मू संभाग में आने वाली 2 सीटों पर तो बीजेपी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं लेकिन कश्मीर की तीनों ही सीटों पर किसी को टिकट नहीं दिया है. ऐसे में बीजेपी के प्लान को लेकर भी कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
इन दिनों चुनाव प्रचार में व्यस्त नेताओं और चुनावी सरगर्मी से दूर अमित शाह कश्मीर में पहुंचे तो यहां की सरगर्मियां बढ़ गईं. अमित शाह ने बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की. कहा जा रहा है कि अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रणनीति भी बताई कि आखिर क्यों बीजेपी यहां पर चुनाव नहीं लड़ रही है. अभी भी बीजेपी ने औपचारिक तौर पर किसी भी पार्टी या उम्मीदवार के समर्थन का ऐलान नहीं किया है.
जम्मू-कश्मीर में होने वाले हैं विधानसभा चुनाव?
रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक कश्मीर पहुंचने अमित शाह ने अपनी पार्टी के स्थानीय नेताओं को संदेश दे दिया है कि वे लोकसभा चुनाव को छोड़कर विधानसभा चुनाव की तैयारी करें. बता दें कि 2019 में संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से यहां विधानसभा के चुनाव नहीं हुए हैं. अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव कराए जाएं, ऐसे में चर्चाएं हैं कि लोकसभा चुनाव के बाद होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव कराए जा सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर की तीनों सीटों पर चुनाव न लड़ने के बारे में अमित शाह ने खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा, 'कुछ लड़ाइयां दुश्मन को हराने के लिए नहीं बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए लड़ी जाती हैं.' इससे पहले वह यह भी कह चुके हैं कि कश्मीर में कमल खिलाने की उन्हें या बीजेपी को कोई जल्दी नहीं है. हालांकि, उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को यह जरूर कहा कि वे पीडीपी, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के वंशवाद को खत्म करने पर जोर दें और इन पार्टियों के खिलाफ वोट करें.
किस ओर है बीजेपी का ध्यान?
श्रीनगर के ललित पैलेस में अमित शाह से मिले लोगों की ओर गौर करें तो समझ आएगा कि बीजेपी लंबा प्लान लेकर चल रही है. उनसे मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में गुज्जर, बकरवाल और सिखों के साथ-साथ पहाड़ी समुदाय के लोग शामिल थे. पिछले पांच साल से बीजेपी जम्मू-कश्मीर में हर फैसला इसी दिशा में ले रही है जिससे कि विधानसभा चुनावों की स्थिति में इन समुदायों के लोग बीजेपी का साथ दें. बतता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार इस साल सितंबर तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं.