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लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह बोले PoK हमारा, 24 सीटें आरक्षित...जानें बड़ी बात

24 Seats Reserved for PoK: लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेहरू के समय में जो गलतियां हुई थीं, उसका खामियाजा वर्षों तक कश्मीर को उठाना पड़ा. 

Amit Mishra
Edited By: Amit Mishra
लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह बोले PoK हमारा, 24 सीटें आरक्षित...जानें बड़ी बात

24 Seats Reserved for PoK: जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2023 और जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2023 को लोकसभा ने पास कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को इसे संसद में पेश किया. पहले जम्मू (Jammu) में 37 सीटें थीं, नए विधेयक के तहत इन्‍हें बढ़ाकर अब 43 कर दिया गया है. वहीं, कश्मीर (Kashmir) में पहले 46 सीटें थी. नए विधेयक के तहत इनकी संख्‍या बढ़ाकर 47 कर दी गई है. पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर के लिए भी नए विधेयक में 24 सीटें आरक्षित की गई हैं. गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा में बिल पेश करते वक्‍त कहा कि पीओके (PoK) के लिए 24 सीट आरक्षित की गई हैं क्‍योंकि पीओके हमारा है.

पीओके हमारा है

गलतियों का उठाना पड़ा खामियाजा 

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नेहरू के समय में जो गलतियां हुई थीं, उसका खामियाजा वर्षों तक कश्मीर को उठाना पड़ा. पहली और सबसे बड़ी गलती- जब हमारी सेना जीत रही थी, पंजाब का क्षेत्र आते ही सीजफायर कर दिया गया और पीओके का जन्म हुआ. अगर सीजफायर तीन दिन बाद होता तो आज पीओके भारत का हिस्सा होता. दूसरा- संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के आंतरिक मसले को ले जाने की गलती की.

'नहीं कहा नेहरू हानिकारक थे'

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जवाब देते हुए बोले कि कश्मीर समस्या का मूल कौन था? मैंने कभी नहीं कहा कि नेहरू हानिकारक थे. गृह मंत्री शाह ने कहा, ''मैं यहां जो विधेयक लेकर आया हूं वह उन लोगों को न्याय दिलाने और उनका अधिकार दिलाने से संबंधित है जिनके खिलाफ अन्याय हुआ, जिनका अपमान हुआ और जिनकी उपेक्षा की गई. किसी भी समाज में जो लोग वंचित हैं उन्हें आगे लाना चाहिए, यही भारत के संविधान की मूल भावना है. उन्हें इस तरह से आगे लाना होगा जिससे उनका सम्मान कम ना हो.''

क्या बोले फारुख अब्दुल्ला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने कहा, "...उस समय, पुंछ और राजौरी को बचाने के लिए सेना को हटाया गया था. अगर ऐसा नहीं किया गया होता, तो पुंछ और राजौरी भी पाकिस्तान में चला जाता... उस समय और कोई रास्ता नहीं था, लॉर्ड माउंटबेटन और सरदार वल्लभभाई पटेल ने भी सुझाव दिया था कि संयुक्त राष्ट्र में जाना चाहिए."