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अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया हादसे की रिपोर्ट हफ्ते भर में होगी सार्वजनिक, 260 लोगों की हुई थी दर्दनाक मौत

यह प्रारंभिक रिपोर्ट न केवल दुर्घटना के कारणों को समझने में महत्वपूर्ण होगी, बल्कि यह हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नीतिगत बदलावों की दिशा में भी एक कदम हो सकती है। संसदीय समिति की सक्रियता और जांच की प्रगति से उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकेगा।

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Edited By: Mayank Tiwari
अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया हादसे की रिपोर्ट हफ्ते भर में होगी सार्वजनिक, 260 लोगों की हुई थी दर्दनाक मौत
Courtesy: Social Media

लगभग एक महीने पहले गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में हुई घातक एयर इंडिया विमान दुर्घटना के बाद, भारत की शीर्ष हवाई दुर्घटना जांच संस्था, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB), ने संसदीय समिति को बताया कि इस सप्ताह इस घटना पर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी. सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि अभी तक कोई अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है और जांच चल रही है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, AAIB अधिकारियों ने संसद की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति स्थायी समिति को सूचित किया कि 12 जून को हुई इस दुर्घटना के 30 दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी थी, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट जमा नहीं की गई है। अधिकारियों ने बताया कि विमान का ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर सुरक्षित है, और इनसे प्राप्त डेटा की जांच की जा रही है. सूत्रों ने कहा, “ब्लैक बॉक्स और वॉयस रिकॉर्डर से डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है.

जानिए क्या है पूरा मामला?

बता दें कि, बीते 12 जून को अहमदाबाद में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर (एयर इंडिया फ्लाइट AI-171) के दुर्घटनाग्रस्त होने से 242 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों में से केवल एक व्यक्ति ही जीवित बचा। इस प्रारंभिक रिपोर्ट में दुर्घटना के कारणों की पहली आधिकारिक व्याख्या होगी, जो कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से प्राप्त जानकारी पर आधारित होगी.

संसदीय समिति की चिंता

संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने अहमदाबाद में हुई इस दुर्घटना और हाल ही में पहलगाम में आतंकी हमले के बाद श्रीनगर से अन्य शहरों के लिए उड़ान किरायों में अचानक वृद्धि पर गंभीर चिंता जताई. जहां बुधवार (9 जुलाई) को हवाई क्षेत्र में सुरक्षा पर एक दिन की बैठक में, समिति के सदस्यों ने सरकारी एजेंसियों और निजी एयरलाइंस से सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठाए.