दिल्ली में 2020 में हुए दंगों के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) की कथित निष्क्रियता को लेकर मुस्लिम समुदाय में नाराजगी जताई जा रही थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के नतीजे कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं. चुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों पर मतदाताओं ने ‘आप’ के पक्ष में मतदान कर झाड़ू को ही प्राथमिकता दी.
दिल्ली की छह प्रमुख मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में से पांच पर आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की. हालांकि, मुस्तफाबाद सीट पर इस बार पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जहां पिछले चुनाव में हाजी यूनुस ने जीत हासिल की थी.
मुस्लिम बाहुल्य मानी जाने वाली सीटें:
सीलमपुर
मुस्तफाबाद (AAP की हार)
मटिया महल
बल्लीमारान
ओखला
बाबरपुर
चुनाव से पहले जताई जा रही थी नाराजगी
चुनाव से पहले विशेषज्ञों द्वारा यह आशंका जताई जा रही थी कि 2020 के दंगे, कोरोना महामारी के दौरान तब्लीगी जमात के मुद्दे और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े विभिन्न विवादों पर आम आदमी पार्टी की चुप्पी के कारण मुस्लिम मतदाता AAP से नाराज हो सकते हैं. हालांकि, चुनावी नतीजों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में AAP को ही पहली पसंद माना गया.
मुस्लिम विधायकों की संख्या में कमी
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में चार मुस्लिम उम्मीदवार विधायक बने हैं, जबकि पिछले चुनाव में यह संख्या पांच थी. इससे साफ संकेत मिलता है कि मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार उम्मीदवारों की व्यक्तिगत छवि और उनकी कार्यशैली को ज्यादा महत्व दिया.
उम्मीदवार की छवि रही निर्णायक
मुस्लिम राजनीति के जानकार एवं ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज़ (CSDS)’ में एसोसिएट प्रोफेसर हिलाल अहमद ने कहा, "इस चुनाव में मतदाताओं ने पार्टी की नीतियों से अधिक उम्मीदवार की छवि को देखा। चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने की घटनाओं ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया, जिससे उन्होंने पार्टी से अधिक व्यक्ति को प्राथमिकता दी." दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने ‘AAP’ में भरोसा दिखाते हुए पांच प्रमुख सीटों पर उसे जिताया। हालांकि, मुस्तफाबाद सीट पर हार यह दर्शाती है कि कुछ क्षेत्रों में पार्टी को मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा.