CBI के 53 ऑफिसर करेंगे मणिपुर हिंसा की जांच, डीआइजी रैंक की दो महिला अधिकारी भी शामिल
Investigation In Manipur Violence: मणिपुर हिंसा मामले में जांच तेज कर दी गई है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि सीबीआई ने इस पूरे मामले की जांच के लिए दो महिला डीआईजी-रैंक के अधिकारी समेत कुल 53 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है.
नई दिल्ली: मणिपुर हिंसा मामले में जांच तेज कर दी गई है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि सीबीआई ने इस पूरे मामले की जांच के लिए दो महिला डीआईजी-रैंक के अधिकारी, एक पुरुष डीआईजी-रैंक अधिकारी और एक एसपी-रैंक के अधिकारी समेत कुल 53 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है.
CBI ने दर्ज किए 8 केस
केंद्रीय एजेंसी ने पूर्वोत्तर राज्य में महिलाओं पर कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित दो मामले समेत कुल आठ मामले दर्ज किए हैं. सूत्रों के हवाले से खबर यह भी है कि अभी और मामले को ट्रांसफर किए जाने की प्रक्रिया जारी है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मणिपुर से जुड़े मामलों की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया है. जांच में शामिल महिला अधिकारी महिलाओं के खिलाफ हुए अपराध से संबंधित मामलों से निपटाएगी.
ये भी पढ़ें: हिमाचल में कुदरत के कहर से मचा हाहाकार, 72 घंटे में 71 लोगों की मौत, करीब 10,000 करोड़ का हुआ नुकसान
जानिए क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि मणिपुर में 3 मई को कुकी समुदाय की ओर से मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ एक मार्च निकाला गया था. इसी मार्च के दौरान दोनों समुदाय के बीच झड़प हुई थी. इस जातीय संघर्ष में अब तक 160 लोगों की मौत हो चुकी है और 3500 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इस हिंसा के चलते राज्य से भारी संख्या में लोगों को पलायन भी करना पड़ा है.
आपको बता दें, स्वतंत्रता दिवस के असवर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि केंद्र और राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि राज्य में जल्द से जल्द शांति लौटे. पीएम ने कहा कि पूरा देश मणिपुर के लोगों के साथ खड़ा है. शांति ही सभी विवादों को सुलझाने का एकमात्र तरीका है. उन्होंने आगे कहा कि केंद्र और मणिपुर सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि राज्य में जल्द से जल्द शांति लौटे.
ये भी पढ़ें: मजह 6 रुपए के लिए गंवानी पड़ी सरकारी नौकरी, कोर्ट ने भी राहत देने से किया इनकार, जानिए क्या है पूरा मामला?