42 हजार से अधिक मृत और अपात्र लोग ले रहे थे पेंशन का लाभ, हिमाचल प्रदेश में सामने आया बड़ा घोटाला

सचिव वित्त डॉ. अभिषेक जैन ने दो टूक कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पैसा केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचना चाहिए, जो वास्तव में इसके हकदार हैं.

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Anuj

शिमला: हिमाचल प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है. जांच में पता चला है कि राज्य में हजारों ऐसे लोग वर्षों से पेंशन ले रहे थे, जो या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं या फिर पेंशन पाने के लिए पात्र ही नहीं थे. कुल 42,867 लाभार्थी ऐसे पाए गए हैं, जिनमें 37,335 लोग मृत हैं और 5,532 लोग पेंशन की शर्तों को पूरा नहीं करते थे. इस गंभीर लापरवाही के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है.

अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश

मामले पर नाराजगी जताते हुए वित्त, योजना, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राज्य सचिवालय में हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस पूरे मामले की जानकारी दी गई. बैठक में बताया गया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों की ई-केवाईसी मोबाइल एप के माध्यम से कराई गई थी. जब इस ई-केवाईसी डाटा का अन्य सरकारी रिकॉर्ड से मिलान किया गया, तब यह बड़ा खुलासा हुआ.

जांच के दौरान सामने आई गड़बड़ी

जांच के दौरान पता चला कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों का नाम अभी भी पेंशन सूची में दर्ज है, जबकि उनकी कई सालों में मृत्यु हो चुकी है या फिर नियमों के अनुसार पेंशन लेने के योग्य नहीं हैं. निदेशक (आईटी) ने बैठक में जानकारी दी कि साल 2016 से अब तक सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल से कुल 4,52,779 मृत्यु के रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं. इनमें से 1,35,473 रिकॉर्ड ऐसे हैं, जिनमें मृत व्यक्ति का आधार नंबर दर्ज पाया गया है.

सचिव वित्त ने जारी किए निर्देश

सचिव वित्त ने निर्देश दिए कि इन सभी आधार-सीडेड रिकॉर्ड का ई-केवाईसी आधारित पेंशन डाटाबेस से तत्काल मिलान किया जाए. उन्होंने साफ कहा कि जो भी लाभार्थी मृत पाए जाएं, उनका नाम बिना किसी देरी के पेंशन योजनाओं से हटाया जाए. बैठक में यह भी बताया गया कि सीआरएस डाटा का सत्यापन पूरा होने के बाद अब तक 2,378 लाभार्थियों को पेंशन योजनाओं से बाहर किया जा चुका है. वहीं, ग्रामीण विकास और स्वास्थ्य विभागों ने इस मामले में और जानकारी मांगी है, ताकि प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके.

भूमिका की जांच होगी

सरकार ने साफ कर दिया है कि यह मामला सिर्फ आंकड़ों को ठीक करने तक सीमित नहीं रहेगा. जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण मृत और अपात्र लोग लंबे समय तक पेंशन लेते रहे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर उच्च स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों तक, सभी की भूमिका की जांच की जाएगी.

जांच प्रक्रिया को सख्त किया जाएगा

सचिव वित्त डॉ. अभिषेक जैन ने दो टूक कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पैसा केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचना चाहिए, जो वास्तव में इसके हकदार हैं. उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए ई-केवाईसी और सीआरएस आधारित जांच प्रक्रिया को और ज्यादा सख्त बनाया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की लापरवाही या धोखाधड़ी की संभावना न रहे.