124 पूर्व आईएएस और आईएफएस (IAS and IFS) अधिकारियों के एक समूह ने चुनाव आयोग (ECI) के समर्थन में एक खुला पत्र जारी किया है. यह पत्र मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज के बचाव में लिखा गया है. इन पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि चुनाव में धांधली या 'वोट चोरी' के बिना पुख्ता सबूत लगाए जाने वाले आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं.
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि इन पूर्व अधिकारियों का संबंध किसी भी राजनीतिक दल से नहीं है. उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि आज बिना किसी ठोस सबूत के 'धांधली' (Rigged) शब्द का इस्तेमाल चुनावों के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है. बार-बार ऐसे बेबुनियाद आरोप लगाने से उस लोकतांत्रिक भरोसे को ठेस पहुंचती है जिस पर देश के हर नागरिक का अधिकार है.
पूर्व अधिकारियों ने अपने लंबे सेवाकाल को याद करते हुए पुराने दौर का जिक्र किया, जब बूथ कैप्चरिंग और बैलेट बॉक्स लूटे जाने की घटनाएं आम थीं. उन्होंने 1989 में संसद द्वारा इसे अपराध घोषित किए जाने की बात याद दिलाई. इसके विपरीत, उन्होंने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण दिया, जहां इतिहास में पहली बार बिना किसी पुनर्मदान (Re-poll) के चुनाव संपन्न हुए और महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया.
पत्र में बताया गया है कि चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कड़े उपाय किए गए हैं. उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट हर बूथ पर निगरानी रखते हैं और डाले गए वोटों की हस्ताक्षरित प्रति अपने साथ ले जाते हैं. मशीनों को एजेंटों के हस्ताक्षर के साथ सील किया जाता है और मजबूत कमरों (Strong Rooms) में सुरक्षित रखा जाता है, जिनकी निगरानी उम्मीदवार खुद कर सकते हैं.
यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने की कोशिश के दौरान, सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, पिनाराय विजयन और माणिक सरकार सहित कई दिग्गज विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया. कुल मिलाकर अब तक 2000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है.
पूर्व नौकरशाहों ने विपक्षी नेताओं से कड़ा सवाल किया कि यदि यह सिस्टम पूरी तरह 'धांधली' वाला है, तो इसी प्रक्रिया के जरिए उन्हें पहले जीत कैसे हासिल हुई. पत्र में यह भी कहा गया कि जनता द्वारा ठुकराए जाने के बाद राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने के लिए इस तरह के निराधार आख्यान रचे जा रहे हैं जो लोकतंत्र को अंदर से कमजोर करते हैं.