'फिक्स चुनावों में भाग ना लें विपक्षी दल', अभिजीत दिपके का कड़ा संदेश, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दिया अल्टीमेटम

सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके ने विपक्ष से धांधली वाले चुनावों के बहिष्कार की मांग की है. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की समयसीमा तय करते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी.

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Sagar Bhardwaj

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने विपक्षी दलों को एक कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली और हेरफेर हो रही है, तो उन्हें तुरंत चुनाव लड़ना बंद कर देना चाहिए. दिपके के अनुसार, निष्पक्षता पर सवाल उठाने के बावजूद लगातार चुनाव में भाग लेना फर्जी चुनावी व्यवस्था को कानूनी वैधता प्रदान करता है.

राजनीतिक अस्तित्व से बढ़कर लोकतंत्र

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए दिपके ने कहा कि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक उपस्थिति खत्म होने के डर से इन चुनावों में हिस्सा लेते हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब वोट चुराए जा रहे हों, पार्टियों को तोड़ा जा रहा हो और प्रतिनिधियों को छीना जा रहा हो, तो ऐसे अस्तित्व को बचाने का कोई औचित्य नहीं है. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को अपनी राजनीतिक भलाई से पहले देश और उसके लोकतंत्र के बारे में सोचना चाहिए.

फिक्स मैच में भी कुछ कैच पकड़े जाते हैं

दिपके ने चुनावी प्रक्रिया की तुलना एक फिक्स्ड क्रिकेट मैच से की. उन्होंने समझाते हुए कहा कि जिस तरह फिक्स्ड मैच को रोमांचक दिखाने के लिए कुछ कैच पकड़े जाते हैं और मैच को अंतिम ओवर तक ले जाया जाता है, ठीक उसी तरह विपक्षी दलों को भी कुछ सीटों पर जीत दी जाती है. इससे आम जनता को लगता है कि मुकाबला वास्तविक और पारदर्शी था, जबकि पूरी प्रक्रिया पहले से तय होती है.


मुख्य चुनाव आयुक्त को दिया अल्टीमेटम

सीजेपी संस्थापक ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि उन्होंने शनिवार तक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो पार्टी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से 'जंतर-मंतर 2.0' नाम से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी. सीजेपी ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा व उन पर आपराधिक कार्रवाई, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर तुरंत रोक, और 2023 के चुनाव आयोग अधिनियम को रद्द कर प्रशासनिक सुधार.

 मीडिया रिपोर्ट के बाद भड़का विवाद

यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद गहराया, जिसमें खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) और डेटाबेस से जुड़े आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां जताई थीं. इसके बाद से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष के सीधे निशाने पर आ गए हैं.

राजनीतिक जगत और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया

दिपके के चुनाव बहिष्कार के सुझाव पर विभिन्न राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं. डीएमके नेता ए. सरवनन ने चिंता व्यक्त की कि चुनाव का बहिष्कार करने से भाजपा को एकतरफा फायदा होगा और विपक्ष पर डरने का आरोप लगेगा. वहीं, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने कहा कि सरकार या किसी के अल्टीमेटम से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया नहीं जा सकता, क्योंकि इसके लिए संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया की आवश्यकता होती है.