menu-icon
India Daily

टाइफाइड होने की दूषित पानी के अलावा ये भी बड़ी वजह, जानलेवा बीमारी से बचने के लिए आज से अपनाएं ये सावधानियां

टाइफाइड, एक जानलेवा बीमारी मानी जाती है. यह दूषित पानी या भोजन के सेवन से फैलती है. चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं टाइफाइड के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में.

princy
Edited By: Princy Sharma
टाइफाइड होने की दूषित पानी के अलावा ये भी बड़ी वजह, जानलेवा बीमारी से बचने के लिए आज से अपनाएं ये सावधानियां
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: आप सब लोगों ने एक बीमारी का नाम सुना होगा जिसे टाइफाइड के नाम से जाना जाता है. टाइफाइड एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से दूषित पानी या भोजन के सेवन से फैलती है. यह बीमारी Salmonella Typhi नामक बैक्टीरिया के कारण होती है जो आंतों को संक्रमित करता है और धीरे-धीरे खून तक पहुंचकर पूरे शरीर में प्रभाव डाल सकता है.

भारत जैसे देशों में, जहां पानी की स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और व्यक्तिगत हाइजीन संबंधी समस्याएं अधिक हैं, वहां टाइफाइड एक आम और गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा जाता है. आमतौर पर टाइफाइड दूषित पानी पीने से या ऐसे भोजन का सेवन करने से होता है जिसे संक्रमित व्यक्ति ने बिना हाथ धोए तैयार किया हो.

कैसे होता है टाइफाइड?

डॉक्टर अनुज कुमार का मानना है कि खुले में बिकने वाला पानी, ठेले-ठेले पर मिलने वाले कटे फल, सलाद और गंदे हाथों से बनाकर दिया गया भोजन टाइफाइड फैलने के सामान्य कारण हैं. खराब सीवेज प्रणाली और पीने के पानी में गंदगी या मल-मूत्र के अंश मिल जाना भी संक्रमण को बढ़ाता है. बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है और आंतों में संक्रमण करके धीरे-धीरे खून में पहुंचता है. यही कारण है कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय रहते इलाज न मिलने पर यह गंभीर रूप ले सकती है.

टाइफाइड की जांच

टाइफाइड का पता लगाने के लिए जांच आवश्यक है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अन्य बुखारों जैसे वायरल फीवर, मलेरिया या डेंगू से मिलते-जुलते होते हैं. आम तौर पर लंबे समय तक रहने वाला बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, भूख में कमी, सिरदर्द और कभी-कभी दस्त या कब्ज इसके प्रमुख लक्षण हैं. डॉक्टर इसके लिए कुछ ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं. सबसे आम जांच विडाल टेस्ट है, जिसमें शरीर में बने एंटीबॉडी की जांच की जाती है.

कैसे होती है टाइफाइड की पहचान?

हालांकि यह जांच हमेशा पूरी तरह से सटीक नहीं मानी जाती. आजकल टाइफाइड के लिए ब्लड कल्चर को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, जिसमें खून के सैंपल से सीधे बैक्टीरिया की पहचान की जाती है. इसके अलावा CBC और लिवर फंक्शन टेस्ट में हल्की गड़बड़ी जैसी चीजें भी देखी जाती हैं. कुछ मरीजों में यूरिन टेस्ट या अल्ट्रासाउंड भी कराया जाता है, खासकर तब जब पेट में अधिक दर्द हो या जटिलता की आशंका हो.

इलाज

टाइफाइड का इलाज मुख्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है. डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षणों और बीमारी की गंभीरता देखकर उपयुक्त एंटीबायोटिक देते हैं. सामान्य मामलों में oral tablet दी जाती हैं और गंभीर मामलों में इंजेक्शन के रूप में एंटीबायोटिक की आवश्यकता होती है.

क्या खाएं?

बुखार और डिहाइड्रेशन कम करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS, नारियल पानी और तरल पदार्थ दिए जाते हैं.  खाना हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए. मरीज के लिए पूर्ण आराम बेहद जरूरी है. इलाज में लापरवाही करने पर आंतों में छेद, खून आना, मानसिक भ्रम और कई अन्य जटिलताएं हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टर की दवाई समय पर और पूरा कोर्स पूरा करना सबसे महत्वपूर्ण है.

टाइफाइड से कैसे करें बचाव ?

साफ पानी पीना, पानी को हमेशा उबालकर या फिल्टर करके इस्तेमाल करना, बाहर का कटा हुआ फल, सलाद, गोलगप्पा, गंदा पानी या सड़क किनारे बनने वाला खाना न खाना, हाथों को साबुन से धोना और भोजन बनाने से पहले स्वच्छता रखना जरूरी है. बच्चों के लिए और उन क्षेत्रों में जहां बीमारी अधिक मिलती है, टाइफाइड का टीका लगवाना बहुत फायदेमंद है.

यह टीका संक्रमण की संभावना को काफी कम कर देता है. खुले में शौच से बचाव, घर के आसपास की सफाई और स्वच्छ पानी की उपलब्धता टाइफाइड को रोकने के सबसे प्रभावी तरीके हैं. सही जानकारी, समय पर जांच, उचित इलाज और सावधानियां मिलकर टाइफाइड को पूरी तरह नियंत्रित कर सकती हैं.