खर्र...खर्र, जंग का नाम सुनकर क्या आपके भी पार्टनर मारने लगे हैं रात में खर्राटे? इस विटामिन की कमी से हो रही नींद खराब

खर्राटे केवल एक नींद की समस्या नहीं, बल्कि यह आपके शरीर में किसी आवश्यक पोषक तत्व की कमी का संकेत भी हो सकता है. विटामिन C की कमी से उत्पन्न सूजन और इम्यून सिस्टम की कमजोरी खर्राटों की जड़ हो सकती है. ऐसे में संतुलित आहार और जीवनशैली में सुधार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.

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Reepu Kumari

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खर्राटे लेना आम समस्या बनती जा रही है, जिसे अधिकांश लोग सामान्य नींद की गड़बड़ी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि विटामिन C की कमी भी रात में खर्राटे आने की एक अहम वजह हो सकती है? हालिया शोधों में यह बात सामने आई है कि विटामिन C की पर्याप्त मात्रा न लेने से न केवल इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, बल्कि स्लीप एपनिया जैसी गंभीर नींद संबंधी समस्याएं भी जन्म ले सकती हैं.

कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि विटामिन C एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है. जब यह पोषक तत्व शरीर में कम हो जाता है, तो नाक और गले की मांसपेशियों में सूजन बढ़ सकती है, जिससे वायुमार्ग सिकुड़ जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत होती है. इसका सीधा असर नींद पर पड़ता है और खर्राटों की समस्या उत्पन्न होती है.

 विटामिन C की कमी के लक्षण

 थकान और कमजोरी
 बार-बार सर्दी-जुकाम
 मसूड़ों से खून आना
 त्वचा पर रुखापन और दाग
 नींद में रुक-रुक कर सांस आना

 कैसे करें इस कमी को दूर?

1. विटामिन C युक्त खाद्य पदार्थ जैसे आंवला, संतरा, नींबू, अमरूद, कीवी, टमाटर और पपीता को नियमित आहार में शामिल करें.
2. धूम्रपान और अत्यधिक तनाव से बचें, क्योंकि ये शरीर में विटामिन C की मात्रा को तेजी से कम करते हैं.
3. डॉक्टर की सलाह से विटामिन C के सप्लीमेंट्स भी लिए जा सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो अक्सर खर्राटों की शिकायत करते हैं.
4. रात को सोने से पहले नाक साफ करना और भाप लेना भी सांस की नली को साफ रखने में मदद करता है.

खर्राटे केवल एक नींद की समस्या नहीं, बल्कि यह आपके शरीर में किसी आवश्यक पोषक तत्व की कमी का संकेत भी हो सकता है. विटामिन C की कमी से उत्पन्न सूजन और इम्यून सिस्टम की कमजोरी खर्राटों की जड़ हो सकती है. ऐसे में संतुलित आहार और जीवनशैली में सुधार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है.