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पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाई लगाम, 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई तो लौटाना होगा पैसा

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी पर सख्ती करते हुए नया कानून लागू करने का फैसला किया है.

Ashutosh
Edited By: Ashutosh Rai
पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाई लगाम, 15% से ज्यादा फीस बढ़ाई तो लौटाना होगा पैसा
Courtesy: X

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अब स्कूल मनमर्जी से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे. तय सीमा से ज्यादा फीस लेने पर अभिभावकों को पैसा लौटाना होगा. सरकार ने इसके लिए नया फीस रेगुलेशन कानून लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है.

फीस बढ़ाने पर अब होगी सख्त निगरानी

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में जिन निजी स्कूलों ने 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त वसूली गई राशि एक महीने के भीतर अभिभावकों को वापस करनी होगी. इसके लिए हर जिले में उपायुक्त (डीसी) की अध्यक्षता में फीस रेगुलेटरी कमेटी बनाई जाएगी. यह कमेटी स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्ड और फीस से जुड़े दस्तावेजों की जांच करेगी. सरकार का कहना है कि यह कदम राज्य के लगभग 7,800 निजी स्कूलों और करीब 32 लाख विद्यार्थियों के परिवारों को राहत देने के लिए उठाया गया है. पहली बार नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये, दूसरी बार एक लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और तीसरी बार स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी.

हर अनिवार्य भुगतान को माना जाएगा फीस

सरकार ने साफ किया है कि स्कूल यदि किसी भी नाम से अभिभावकों से अनिवार्य भुगतान लेते हैं, तो उसे फीस माना जाएगा. केवल स्वैच्छिक गतिविधियों, जैसे शैक्षणिक या शैक्षिक टूर के लिए लिया गया शुल्क इस नियम में शामिल नहीं होगा. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कई निजी स्कूल ट्यूशन फीस कम दिखाकर ट्रांसपोर्ट, कंप्यूटर, बिल्डिंग या अन्य मदों के नाम पर अलग-अलग रकम वसूलते हैं. अब ऐसे मामलों की फोरेंसिक ऑडिट कराई जाएगी. जांच में यह भी देखा जाएगा कि किसी ट्रस्ट, कंपनी या अन्य संस्था के जरिए अतिरिक्त पैसे तो नहीं लिए गए. अगर अधिक वसूली साबित होती है तो स्कूलों को सीधे अभिभावकों के बैंक खाते में पैसा लौटाना होगा.

ऑनलाइन पोर्टल से बढ़ेगी पारदर्शिता

सरकार जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगी, जहां सभी निजी स्कूलों को अपनी मौजूदा फीस, पिछले वर्षों की फीस और फीस बढ़ोतरी का पूरा रिकॉर्ड अपलोड करना होगा. फीस रेगुलेटरी कमेटी जरूरत पड़ने पर पुराने रिकॉर्ड की भी जांच करेगी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के विद्यार्थियों से जुड़े नियमों की भी समीक्षा करेगी. मुख्यमंत्री मान ने कहा कि कई परिवार ज्यादा फीस के कारण बच्चों की पढ़ाई बीच में छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं. नए कानून का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, निजी स्कूलों की मनमानी रोकना और अभिभावकों पर बढ़ रहे आर्थिक बोझ को कम करना है.