उत्तर-पश्चिम भारत में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है. घर से निकलते ही तेज धूप के कारण लोगों को थपेड़े पड़ रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर में तापमान 43 डिग्री तक पहुंच चुका है. राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी लू ने लोगों के जीवन को मुश्किल कर दिया है. अगर तापमान इसी तरीके से बढ़ता रहा तो जल्द ही 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है.
किसी भी इंसान के शरीर के लिए 50 डिग्री सेल्सियस बहुत ज्यादा होता है. अगर इस तापमान में अंडे को तोड़ कर रखा जाए तो कुछ मिनट में ही आमलेट बन सकता है. इस गर्मी में इंसान का शरीर भी सही तरीके से काम नहीं करता और कई साइड इफेक्ट होते हैं.
आपको बता दें कि 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान पहुंचने पर कई परेशानियां हो सकती हैं. लोगों के ब्रेन से लेकर शरीर के अलग-अलग हिस्से प्रभावित हो सकती है. बता दें कि किसी भी इंसान के शरीर का सामान्य तापमान लगभग 98 डिग्री फारेनहाइट होता है. अगर इसे सेल्सियस में मापा जाए तो यह करीब 37 डिग्री होगा.
इतने पर इंसान सामान्य रूप से जीवन जी सकता है. वहीं अगर किसी भी इंसान के शरीर का तापमान 108 डिग्री फारेनहाइट यानी लगभग 42 डिग्री सेल्सियस पहुंचता है तो उसके लिए एक-एक सांस मुश्किल हो जाती है. इसका सीधा असर ब्रेन पर पड़ सकता है. आपके दिमाग के सेल्स मरने शुरू हो जाते हैं. आपको चक्कर आ सकता है. स्थिति खराब होने पर ब्रेन में ब्लीडिंग हो सकती है. इसके अलावा इंसान का हृदय भी थम सकता है.
आपका हृदय आपके शरीर में खून को प्रवाहित करता है, जिससे आपके शरीर का तापमान ठंडा होता है, ऐसी गर्मी में अगर पहले से ही कोई हृदय संबंधी समस्या हो तो स्थिति खराब हो सकती है. ऑक्सीजन दिमाग तक नहीं पहुंचने पर सांस की समस्या हो सकती है. ज्यादा तापमान में सबसे पहले शरीर की पाचन प्रक्रिया खराब हो सकती है. इसलिए गर्मी से बचना जरूरी है. अपने शरीर के तापमान को मेंटेन करने के लिए पर्याप्त पानी पिएं. ज्यादा भारी काम अभी ना करें और संभव हो तो छाया में ही रहें.