पैर पसार रहा चिकनपॉक्स, बचना है तो जान लें इसके लक्षण और कैसे फैलता है संक्रण

चिकनपॉक्स, जिसे छोटी माता भी कहते हैं, वैरिसेला-जोस्टर वायरस (VZV) से होने वाली बेहद संक्रामक बीमारी है. यह हवा से, खांसने-छींकने या दाने के संपर्क से फैलती है.

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Reepu Kumari

नई दिल्ली: बिहार में कई मामले अबतक चिकनपॉक्स के दर्ज हो चुके हैं. चिकनपॉक्स एक पुरानी लेकिन अब भी आम वायरल बीमारी है, जो खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों में तेजी से फैलती है. वैरिसेला-जोस्टर वायरस के कारण होने वाली यह बीमारी इतनी संक्रामक है कि एक संक्रमित बच्चा आसानी से पूरे परिवार या क्लास को प्रभावित कर सकता है. भारत में सर्दियों और वसंत में इसके मामले बढ़ जाते हैं.

पहले इसे बचपन की सामान्य बीमारी माना जाता था, लेकिन टीका लगवाने से अब काफी हद तक नियंत्रित हो गई है. फिर भी, जिन्हें टीका नहीं लगा या पहले नहीं हुआ, उन्हें खतरा रहता है. लक्षण दिखने में 10-21 दिन लगते हैं और बीमारी आमतौर पर हल्की होती है, लेकिन खुजली और असुविधा बहुत परेशान करती है.

चिकनपॉक्स कैसे फैलता है

यह वायरस हवा में खांसने, छींकने या बात करने से फैलता है. संक्रमित व्यक्ति के दाने या फफोलों के तरल से सीधे संपर्क से भी होता है. बीमारी का सबसे ज्यादा फैलाव दाने निकलने से 1-2 दिन पहले और फफोले फूटने तक रहता है. एक बार दाने पपड़ी बन जाएं, तब संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.

कौन ज्यादा प्रभावित होते हैं

ज्यादातर मामले 10 साल से कम उम्र के बच्चों में होते हैं, खासकर 1 से 9 साल के बीच. स्कूल और खेलने के मैदान में यह तेजी से फैलता है. भारत में भी स्कूली बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. वयस्कों में कम होता है, लेकिन अगर होता है तो गंभीर रूप ले सकता है.

वयस्कों और गर्भवती महिलाओं में खतरा

बड़े लोगों, गर्भवती महिलाओं या कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों में चिकनपॉक्स ज्यादा खतरनाक हो सकता है. इसमें निमोनिया, त्वचा संक्रमण या दिमाग पर असर जैसी जटिलताएं आ सकती हैं. इसलिए ऐसे लोगों को तुरंत डॉक्टर दिखाना चाहिए.

शुरुआती लक्षण क्या दिखते हैं

बीमारी शुरू होने पर हल्का बुखार (38-39 डिग्री), थकान, सिरदर्द और भूख न लगना जैसे लक्षण पहले आते हैं. ये 1-2 दिन तक रह सकते हैं. कई बच्चों में दाने ही पहला संकेत होते हैं, बुखार बाद में आता है.

दाने का विकास कैसे होता है

सबसे पहले लाल धब्बे निकलते हैं, जो खुजलीदार होते हैं. ये छाती, पीठ या चेहरे से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं. धब्बे फफोलों में बदलते हैं, जिनमें पानी जैसा तरल भर जाता है. ये फूटकर पपड़ी बनाते हैं और 5-10 दिन में ठीक हो जाते हैं.

खुजली और अन्य परेशानियां

दाने बहुत ज्यादा खुजली करते हैं, जिससे बच्चे बार-बार खुजाते हैं और संक्रमण बढ़ सकता है. मुंह या गले में भी छोटे घाव हो सकते हैं. गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द या जोड़ों में हल्का दर्द भी आम है.

बीमारी कितने दिनों तक रहती है

इनक्यूबेशन पीरियड 10-21 दिन का होता है. लक्षण दिखने के बाद दाने 5-10 दिन तक नए-नए आते रहते हैं. पूरी बीमारी आमतौर पर 1-2 हफ्ते में ठीक हो जाती है. पपड़ी गिरने के बाद व्यक्ति सामान्य हो जाता है.

रोकथाम का सबसे अच्छा तरीका

चिकनपॉक्स का टीका (वरिसेला वैक्सीन) दो डोज में लगवाना सबसे प्रभावी बचाव है. पहली डोज 12-15 महीने की उम्र में और दूसरी 4-6 साल में. टीका लगवाने से बीमारी या तो नहीं होती या बहुत हल्की रहती है.

घरेलू देखभाल के टिप्स

बुखार के लिए पैरासिटामॉल दें, खुजली कम करने के लिए ठंडे पानी से नहलाएं या कैलामाइन लोशन लगाएं. बच्चे को खुजलाने से रोकें ताकि निशान न पड़ें. ज्यादा पानी पिलाएं और आराम करवाएं.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com  इन मान्यताओं और जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.