ब्लड डोनेशन से जुड़ी 5 बड़ी गलतफहमियां
ब्लड डोनेशन सेफ
डॉक्टर के मुताबिक, खून दान को लेकर सबसे बड़ी बाधा गलत जानकारी से पैदा हुआ डर है. उनका कहना है कि ब्लड डोनेशन एक सुरक्षित और पूरी तरह निगरानी में किया जाने वाला मेडिकल प्रोसीजर है.
खून दान से कमजोरी
हकीकत यह है कि एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पर्याप्त खून होता है. दान किया गया खून कुछ ही हफ्तों में शरीर खुद बना लेता है. शुरुआत में हल्की थकान हो सकती है, लेकिन सही खानपान और पानी पीने से कोई स्थायी कमजोरी नहीं होती.
खतरा लगभग नहीं के बराबर
आज भी कई लोग संक्रमण के डर से ब्लड डोनेशन से बचते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि दान के दौरान स्टेरलाइज्ड और सिंगल-यूज सुइयों का इस्तेमाल किया जाता है.
कौन कर सकता है खून दान
खून दान के लिए बॉडी बिल्डर या एथलीट होना जरूरी नहीं. औसत फिटनेस और तय न्यूनतम वजन होने पर कोई भी स्वस्थ व्यक्ति सुरक्षित रूप से खून दान कर सकता है.
पीरियड्स पर असर
अक्सर माना जाता है कि खून दान से महिलाओं के हार्मोन या पीरियड्स प्रभावित होते हैं. डॉक्टर स्पष्ट करते हैं कि ब्लड डोनेशन का मासिक धर्म चक्र या हार्मोनल बैलेंस पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता.
हीमोग्लोबिन की जांच
हर ब्लड डोनेशन से पहले हीमोग्लोबिन की जांच की जाती है. तय अंतराल पर जिम्मेदारी से दान करने से एनीमिया नहीं होता, बल्कि नियमित हेल्थ चेकअप से सेहत की बेहतर निगरानी होती है.
सही जानकारी और जागरूकता
ब्लड डोनेशन सुरक्षित, तेज़ और मेडिकल देखरेख में होता है. दान किया गया एक यूनिट खून कई मरीजों की जान बचा सकता है. डॉक्टरों का मानना है कि सही जानकारी और जागरूकता से डर खत्म किया जा सकता है.