बस अब और खाना नहीं! पेट भरते ही दिमाग में क्यों बजती है ये घंटी, वैज्ञानिकों ने खोल दिया सीक्रेट

वैज्ञानिकों ने खोज की है कि पेट भरने का सिग्नल दिमाग तक पहुंचाने में न्यूरॉन्स के अलावा टैनीसाइट्स और एस्ट्रोसाइट्स नाम की कोशिकाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. यह चेन रिएक्शन भूख बंद करने और तृप्ति का एहसास कराती है. इस खोज से मोटापे के इलाज में नई उम्मीद जगी है.

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Kuldeep Sharma

खाने के दौरान एक समय ऐसा आता है जब अचानक भूख खत्म हो जाती है और दिमाग कहता है- बस, अब और नहीं. यह प्रक्रिया पहले सिर्फ न्यूरॉन्स से जुड़ी मानी जाती थी, लेकिन नई रिसर्च ने इस धारणा को बदल दिया है. अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी और चिली की यूनिवर्सिटी ऑफ कॉन्सेप्सियन की स्टडी में वैज्ञानिकों ने दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से में एक खास चेन रिएक्शन की खोज की है, जो पेट भरने का सिग्नल दिमाग तक पहुंचाता है.

दिमाग का कंट्रोल रूम और नई खोज

दिमाग का हाइपोथैलेमस हिस्सा भूख और तृप्ति को नियंत्रित करता है. स्टडी में पता चला कि जब हम खाना खाते हैं तो खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है. इस बदलाव को हाइपोथैलेमस में मौजूद टैनीसाइट्स नाम की कोशिकाएं पहचान लेती हैं. ये कोशिकाएं लैक्टेट नाम का केमिकल रिलीज करती हैं, जिससे एक चेन रिएक्शन शुरू हो जाता है. यह रिएक्शन एस्ट्रोसाइट्स नाम की कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जो आगे ग्लूटामेट सिग्नल भेजती हैं.

कैसे बंद होती है भूख?

ग्लूटामेट सिग्नल उन न्यूरॉन्स तक पहुंचता है जो भूख को बढ़ाते हैं. इससे भूख बढ़ाने वाले न्यूरॉन्स शांत हो जाते हैं और तृप्ति का एहसास होने लगता है. यानी पेट भरने का मैसेज सिर्फ न्यूरॉन्स नहीं, बल्कि टैनीसाइट्स और एस्ट्रोसाइट्स की मदद से दिमाग तक पहुंचता है. इससे पहले वैज्ञानिक मानते थे कि एस्ट्रोसाइट्स सिर्फ सपोर्ट वाली कोशिकाएं हैं, लेकिन अब पता चला है कि ये भूख नियंत्रण में सक्रिय भूमिका निभाती हैं. 

मोटापे के इलाज में नई उम्मीद

यह खोज मोटापे और खाने से जुड़ी बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी साबित हो सकती है. अगर वैज्ञानिक इस चेन रिएक्शन को दवाओं से नियंत्रित कर सकें, तो बिना सख्त डाइट के ही व्यक्ति को पेट भरने का एहसास कराया जा सकता है. इससे कम खाना खाने की आदत पड़ेगी और वजन नियंत्रण में आसानी होगी. रिसर्च टीम का मानना है कि गरीब और मध्यम आय वाले देशों में मोटापे की समस्या से निपटने में यह खोज बहुत उपयोगी साबित होगी.

बचाव के लिए क्या करें?

वैज्ञानिकों का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. ज्यादा चीनी और प्रोसेस्ड फूड से बचें, नियमित व्यायाम करें और संतुलित आहार लें. अगर समय रहते इन आदतों में सुधार किया जाए तो मोटापा और लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. सरकारों से भी अपील की गई है कि जंक फूड और मीठी ड्रिंक्स पर टैक्स बढ़ाकर लोगों को स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित किया जाए.